मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला में कोयला परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। मोरवा साइडिंग की ओर जाने वाले मार्ग पर चल रहे भारी वाहनों को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि इंटरनल कोयला ढुलाई का कार्य करने वाली चड्ढा कंपनी कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए ओवरलोड वाहनों का संचालन कर रही है।
स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, कंपनी के डंपर और ट्रक खुलेआम निर्धारित क्षमता से अधिक कोयला लादकर परिवहन करते नजर आते हैं। इन वाहनों पर अक्सर कोयले को ढंकने के लिए तिरपाल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ओवरलोडिंग के कारण कोयला बाहर तक भरा रहता है, जिससे सड़क पर गिरने और धूल फैलने की समस्या भी बनी रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ओवरलोडिंग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि इससे सड़कें भी तेजी से क्षतिग्रस्त होती हैं। भारी और असंतुलित लोड के कारण इन वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है, जिससे आम नागरिकों की जान को भी खतरा हो सकता है।
आरोप यह भी है कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभागों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कई बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे कंपनी द्वारा मनमाने ढंग से परिवहन कार्य जारी है। जिम्मेदारों की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि वास्तव में ओवरलोडिंग हो रही है, तो परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिरकार कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
❓ उठते सवाल:
- क्या ओवरलोड कोयला परिवहन की निष्पक्ष जांच होगी?
- क्या संबंधित कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी?
- क्या सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन ठोस कदम उठाएगा?


