नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस प्रदान कर दिया है। यह लाइसेंस यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाई आईएपीएल) को दिया गया है, जो इस हवाईअड्डे का विकास और संचालन कर रही है। इस लाइसेंस के साथ ही एयरपोर्ट से उड़ानों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित की जा रही है। डीजीसीए ने इस एयरपोर्ट को ‘पब्लिक यूज’ श्रेणी के तहत लाइसेंस दिया है, जिससे यह हर मौसम में संचालन करने में सक्षम होगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस
एयरपोर्ट में 10/28 ओरिएंटेशन वाली 3,900 मीटर लंबी और 45 मीटर चौड़ी रनवे बनाई गई है। इसमें इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आइएलएस) और एयरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे यहां 24 घंटे विमान संचालन संभव होगा। एयरपोर्ट पर 24 कोड-सी और 2 कोड-डी/एफ श्रेणी के विमानों के लिए पार्किंग स्टैंड बनाए गए हैं।
इसके अलावा यहां एआरएफएफ कैटेगरी-9 की अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे बोइंग 777-300ईआर जैसे बड़े वाइड-बॉडी विमानों का संचालन भी संभव होगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है, जिसमें एक मल्टी-मॉडल कार्गो हब भी शामिल है।
NCR का प्रमुख एविएशन हब बनेगा
पहले चरण में एक रनवे और एक टर्मिनल के साथ यह एयरपोर्ट सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। सभी चरण पूरे होने के बाद इसकी क्षमता बढ़कर करीब 7 करोड़ यात्रियों प्रतिवर्ष तक पहुंच जाएगी। इसके साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रमुख एविएशन हब के रूप में उभरेगा।
डीजीसीए की उक्त अनुमति के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापू ने उत्तर प्रदेश सरकार को बधाई देते हुए कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय यह एयरपोर्ट क्षेत्रीय आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देगा तथा स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य के मेल के साथ यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करेगा। साथ ही इससे क्षेत्र के मौजूदा हवाईअड्डों पर बढ़ते दबाव को भी कम करने में मदद मिलेगी।


