भागवत ने कहा कि हम सभी भेद और स्वार्थ को तिलांजली देकर और देश के लिए जीने-मरने को तैयार हो जाए तो हमारा समाज अच्छा बनेगा। भारत विश्वगुरु बनकर एक सुखी-सुंदर दुनिया को जन्म देगा। हम सभी मूल रूप से समान हैं क्योंकि परमात्मा एक ही है। जब समाज में अनेकता का आभास होने लगता है तो अलगाव की स्थिति पैदा होने में देर नहीं लगती। इसलिए हमें सदैव एकता पर ही ध्यान रखना चाहिए।