राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सद्भावना व एकता पर जोर देते हुए कहा कि समय बड़ा कठिन है। हम बंटे हुए हैं, इसलिए चारों तरफ आक्रमण हो रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग अभी खत्म भी नहीं हुआ था। इसी बीच अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग शुरू हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि हम अपने एकत्व को नहीं पहचानते, इसलिए दुनियाभर में कलह थमती नहीं है और युद्ध चलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि लोग मन की करूणा भूल गए हैं और इस सत्य को भूल गए कि हम दिखते अलग-अलग हैं लेकिन हम सब एक हैं। जब हम विविधता को अलगाव की ²ष्टि से देखने लगते हैं, तब मतभेद पैदा होते हैं, इसलिए विविधता को स्वीकार करते हुए भी अपनी एकता को नहीं भूलना चाहिए।
संघ प्रमुख जैसलमेर में जैन समुदाय के चादर महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर ‘धर्म सभा’ में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पहला विश्व युद्ध हुआ, यह फिर से न हो इसलिए लीग ऑफ नेशंस की स्थापना हुई। लेकिन वह नहीं चली। फिर दूसरा विश्व युद्ध हुआ। यह फिर से न हो इसलिए संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई। लेकिन अब देख रहे हैं कि क्या हालात हैं। वह अपनी जगह पर है, निष्प्रभावी है। जो युद्ध चल रहे हैं वे थम नहीं रहे।
भागवत ने कहा कि हम सभी भेद और स्वार्थ को तिलांजली देकर और देश के लिए जीने-मरने को तैयार हो जाए तो हमारा समाज अच्छा बनेगा। भारत विश्वगुरु बनकर एक सुखी-सुंदर दुनिया को जन्म देगा। हम सभी मूल रूप से समान हैं क्योंकि परमात्मा एक ही है। जब समाज में अनेकता का आभास होने लगता है तो अलगाव की स्थिति पैदा होने में देर नहीं लगती। इसलिए हमें सदैव एकता पर ही ध्यान रखना चाहिए।


