चंद्रग्रहण के समय देव विग्रहों को स्पर्श करने या उनका पूजन करने का विधान नहीं है। ऐसे में चंद्रग्रहण के पूर्व ही सभी मंदिरों के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
श्रद्धालु मंदिर परिसर में कहीं बैठकर मानसि जप-तप, यज्ञ-हवनादि कर सकते हैं। इस बार भी फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार को लगने वाले खंड चंद्रग्रहण के दिन सभी मंदिरों के गर्भगृहों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे और ग्रहण मोक्ष होने के उपरांत खोले जाएंगे।
ग्रहण के डेढ़ घंटे पहले बंद हो जाएंगे कपाट
पूरे मंदिर की साफ-सफाई व देव विग्रहों के स्नान-आरती के उपरांत ही आम श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन सुलभ हो सकेगा। इसी क्रम में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट परंपरानुसार ग्रहण के डेढ़ घंटे पूर्व बंद कर दिए जाते हैं।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि चंद्रग्रहण इस बार ग्रस्तोदित होगा यानी पूर्व से ही ग्रहणयुक्त चंद्रमा का उदय होगा।
वैसे तो ग्रहण दोपहर बाद 3:20 बजे ही लग जाएगा लेकिन काशी में चंद्रोदय 5:58 बजे होगा। इसलिए परंपरा के अनुसार मंदिर का कपाट 4:30 बजे बंद हो जाएगा। 6:48 बजे ग्रहण मोक्ष के उपरांत 7:15 बजे मंदिर साफ-सफाई के उपरांत पुन: श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।


