एम्स में नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली की पुष्टि के बाद अब स्टाफ नर्सों की प्रोन्नति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। एम्स की स्टाफ नर्सों ने प्रोबेशन पर तैनात नर्सों को प्रोन्नति देने और स्थाई नर्सों को किनारे किए जाने का आरोप लगाते हुए मुख्य सतर्कता अधिकारी से शिकायत की है। नर्स एम्स की कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता से भी शिकायत कर चुकी हैं लेकिन कोई कार्रवाई न होने के बाद उन्होंने मुख्य सतर्कता अधिकारी को पत्र लिखा है।
पत्र में लिखा है कि स्टाफ नर्स ग्रेड एक के पद पर वर्ष 2023-24 में नियुक्ति हुई थी। स्टाफ नर्स को दो वर्ष के प्रोबेशन पीरियड पर रखा जाता है। कई नर्सों का प्रोबेशन पीरियड पूरा हो चुका है। इस बीच प्रोन्नति के लिए आवेदन लिए गए लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित पात्रता मानदंडों (सातवें सीपीसी के अनुसार वेतन स्तर- सात) का सख्ती से पालन नहीं किया गया है।
जिन उम्मीदवारों ने आवश्यक पात्रता आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया, उन्हें शामिल होने की अनुमति दी गई है। चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के बारे में संदेह पैदा करते हुए दिव्यांग उम्मीदवारों समेत किसी भी श्रेणी के लिए कोई न्यूनतम योग्यता अंक घोषित नहीं किए गए।
ऐसा प्रतीत होता है कि कृत्रिम रूप से कट-आफ अंकों को कम कर भर्ती को अंतिम रूप दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप जिन उम्मीदवारों का चयन किया गया उनमें से कई योग्यता पूरी नहीं किए हैं। वैध प्रतीक्षा सूची के बिना संबद्ध पत्र जारी किए गए। यह स्थापित भर्ती मानदंडों और प्रक्रियाओं के खिलाफ है।


