4 दशक से मुआवजे के इंतजार में बक्सर-कोईलवर तटबंध के भूमि दाता, लिस्ट का इंतजार कर रहे अफसर
करीब चार दशक पहले निर्मित बक्सर-कोईलवर तटबंध के लिए जमीन देने वाले नियाजीपुर खुर्द मौजा के करीब 75 परिवार अब तक मुआवजे के इंतजार में हैं। इन परिवारों की संख्या अब विभाजन के कारण बढ़ चुकी है। पुराने शाहाबाद जिले (अब बक्सर और भोजपुर) के दियारा इलाके को गंगा और सोन की बाढ़ से बचाने के लिए इसका निर्माण हुआ था।
अब एक हालिया योजना के तहत तटबंध के सुदृढ़ीकरण और इस पर पक्की सड़क निर्माण कार्य शुरू होने पर प्रभावित परिवारों ने विरोध शुरू कर दिया है। इसका परिणाम यह है कि सिमरी प्रखंड के नियाजीपुर गांव के पास करीब तीन किलोमीटर लंबाई में सड़क निर्माण रुक गया है।
अधिकांश भूमि दाताओं को मुआवजा मिल गया, लेकिन नियाजीपुर खुर्द के करीब 75 रैयतों, जिनमें धनंजय पाठक, संदीप कुमार चौबे आदि शामिल हैं, का दावा है कि वे भुगतान से वंचित हैं। वे वर्षों से कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, फाइलें टेबल-टेबल घूमती रहीं, कई ने कोर्ट का रुख भी किया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
सिमरी के अंचल अधिकारी से मांगी गई रिपोर्ट
बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल ने सिमरी के अंचलाधिकारी से रिपोर्ट मांगी है कि किन-किन रैयतों का मुआवजा लंबित है। अंचल कार्यालय से भूमि दाताओं की सूची मंगाई गई है, ताकि बकाया भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ सके। यह भूमि अधिग्रहण उस समय हुआ था जब बक्सर, भोजपुर जिले के अंतर्गत आता था।
उस दौर में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, भोजपुर द्वारा पत्राचार हुआ, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा। वर्तमान में लगभग 28 एकड़ भूमि का मुआवजा शेष बताया जा रहा है।
1974 में शुरू हुआ था तटबंध का निर्माण
बक्सर-कोईलवर गंगा तटबंध बिहार के बक्सर और भोजपुर जिलों में गंगा नदी के दाहिने किनारे पर स्थित प्रमुख बाढ़ सुरक्षा संरचना है। यह दियारा क्षेत्रों और आसपास के कृषि क्षेत्रों को गंगा तथा सोन की बाढ़ और कटाव से बचाने के लिए बनाया गया था। 1971 में केंद्रीय मंत्री के दौरे के बाद 1972 में जांच शुरू हुई, 1974 में योजना मंजूर हुई और कार्य प्रारंभ हुआ।


