पीड़ित मानवता की सेवा में सक्रिय रहने वाली समाजसेवी अनुराधा खेतान (40 वर्ष) का गुरुवार तड़के हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया। रात करीब 12 बजे सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें भागलपुर के एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था, जहां सुबह लगभग तीन बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन की खबर फैलते ही शहर और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। खंजरपुर स्थित आवास पर बड़ी संख्या में शुभचिंतक और समर्थक पहुंचने लगे। बाद में पार्थिव शरीर को झौआ कोठी से पैतृक गांव मानिकपुर (पीरपैंती) लाया गया, जहां कहलगांव के बटेश्वर नाथ धाम स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। पति विष्णु खेतान ने मुखाग्नि दी।
जन्मदिन के बाद बिगड़ी तबीयत
बताया जाता है कि बुधवार रात उन्होंने अपने चार वर्षीय पुत्र राजवीर का जन्मदिन मनाया था। कार्यक्रम के बाद अचानक सीने में दर्द हुआ। परिवार उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। हर वर्ष की तरह इस बार भी होली पूर्व आयोजित होने वाली खाटू श्याम निशान यात्रा की तैयारियां चल रही थीं। मातृशक्ति जत्थे के साथ वे आयोजन की अधिकांश तैयारियां पूरी कर चुकी थीं, लेकिन असामयिक निधन से सभी तैयारियां अधूरी रह गईं।
समाजसेवा और धार्मिक आयोजनों में रहती थीं सक्रिय
अनुराधा खेतान सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। कोरोना काल से लेकर विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों तक वे सेवा कार्यों में अग्रणी रहीं। पति विष्णु खेतान, जो केंद्रीय रेल यात्री संघ से जुड़े हैं, के अभियानों में भी वे सक्रिय सहयोग देती थीं। सावन माह में आयोजित बटेश्वर महोत्सव और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। महिला जागरूकता और सशक्तिकरण से जुड़े कार्यक्रमों में भी वे सक्रिय थीं।


