सांप्रदायिक दंगे के दौरान थाना शाहपुर क्षेत्र के गांव कुटबा में महिला समेत आठ लोगों हत्या, आगजनी, तोड़फोड़ व घरों में लूटपाट के मुकदमे में 32 आरोपितों को न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
इस मामले में कुल 36 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी, इनमें से चार आरोपितों की पूर्व में मृत्यु हो चुकी है। 13 साल चले इस मुकदमे में 200 से अधिक तारीख लगीं और 30 से अधिक गवाह पेश किए गए।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष पोक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-प्रथम की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया के न्यायालय में हुई।
वर्ष 2013 में जब जिले में सांप्रदायिक दंगा भड़का था। शाहपुर के गांव कुटबा निवासी इमरान पुत्र शमशाद ने शाहपुर थाने पर दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए थे। जिनमें कुंवरपाल पुत्र मांगा जाट, योगेंद्र उर्फ जोगेंद्र नाहर सिंह तथा दूसरे मुकदमे में मनोज पुत्र मान सिंह पर अभियोग दर्ज कराया था।
इनमें बताया था कि आठ सितंबर 2013 को लगभग 09 बजे सुबह मुसलमानों को मारने के नारे लगाते हुए 111 से अधिक लोग ने हाथों में राइफले, बन्दूकें, तमंचे, तलवारे, तबल, पलकटी, बल्लम, भाले धारदार हथियार लेकर मुस्लिम समाज के घरों में हमला बोल दिया। लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया।
चारों तरफ अंधाधुंध गोलीबारी की। गोली बारी से कई अनेक व्यक्ति जख्मी हो गए। जान बचाने के लिए भगदड़ मच गई। हमलावरों ने मस्जिद में तोड़फोड़, घरों में आगजनी, मोटर साइकिलों में आग, दुकानों में आग, जेनरेटर में आग लगा दी। साथ साथ हमारा कीमती सामान, धन (नगदी) एवं पशुधन लूट लिया गया।
लगभग 11.30 सुबह पुलिस बल ने आकर जान बचाई। पुलिस ने विवेचना के बाद 36 लोगों को आरोपित बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अजय सहरावत ने बताया कि इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या प्रथम) मंजुला भालोटिया के न्यायालय में हुई।


