केंद्रीय कैबिनेट का संकल्प: ‘सेवा तीर्थ’ शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि सशक्तीकरण का होगा केंद्र

2.2kViews
1744 Shares

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में अपनी पहली बैठक में यह संकल्प लिया कि यहां लिया गया प्रत्येक निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होगा और हर भारतवासी के सशक्तीकरण का केंद्र होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय किया गया कि सेवा तीर्थ से संचालित शासन का हर प्रयास देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने की दिशा में होगा।

‘सेवा संकल्प प्रस्ताव’ के अनुसार, नए भवन में लिया गया प्रत्येक निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के प्रति सेवा-भाव से प्रेरित होगा और राष्ट्र-निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा रहेगा। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह स्थान शक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतवासी के सशक्तीकरण का केंद्र होगा।

उल्लेख किया गया है कि शासन को पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक की संवेदनाओं के प्रति सजग बनाना आवश्यक है। प्रस्ताव में सेवा तीर्थ की कार्य-संस्कृति में इसी भावना को निहित किया गया है, जहां हर नीति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर निर्णय देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होगा।

इसमें कहा गया है कि यह बैठक एवं यह भवन नए भारत के नवनिर्माण की एक स्पष्ट अभिव्यक्ति है। इसमें कहा गया है-‘हमने एक ऐसे भारत के सपने देखे, जिसका सोच स्वदेशी हो, स्वरूप आधुनिक हो और सामर्थ्य अनंत हो।

आज यह सेवातीर्थ उसी संकल्पना का वह मूर्त रूप है, जो लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत के गौरव को बढ़ाएगा।’मंत्रिमंडल ने इस अवसर पर इस स्थान के इतिहास को भी स्मरण किया, जो ब्रिटिश शासन काल के अस्थायी बैरकों के स्थान पर बना है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि गुलामी के कालखंड से पहले भारत की पहचान एक ऐसे राष्ट्र के रूप में थी जो अपनी भौतिक भव्यता और मानवीय मूल्यों के लिए जाना जाता था। सेवातीर्थ की संकल्पना इन दोनों आदर्शों से मिलकर बनी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *