स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही मंगलवार को एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। इटावा के चकूपुरा गांव में सुबह हादसे के बाद घायल हुए इरादत नगर के 40 वर्षीय मजदूर को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से उनकी मौत हो गई।
स्वजन ने मदद के लिए एंबुलेंस सेवा को करीब 20 बार फोन किया, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि कोई एंबुलेंस खाली नहीं है। करीब एक घंटे तक वह जमीन पर पड़े तड़पते रहे। स्वजन निजी वाहन से उन्हें जिला अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
20 बार फोन करने के बाद भी नहीं पहुंची मौके पर एंबुलेंस
इरादत नगर के गांव महाव निवासी महेश वाल्मीकि लगभग 25 वर्ष पहले अपनी ससुराल चकूपुरा आकर रहने लगे थे। मंगलवार सुबह लगभग आठ बजे घर के बाहर बंधे जानवरों के पास झाड़ू लगाकर वह घर के अंदर दाखिल हुए, तभी दरवाजे की देहरी से ठोकर लगने के कारण सिर के बल गिर पड़े। सामने रखी ईंट में सिर टकराने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। सिर से खून बहने लगा।
सिर में चोट लगने के बाद समय पर नहीं मिल सका इलाज
स्वजन एंबुलेंस के लिए फोन मिलाते रहे और उनके सिर से खून बहता रहा। वह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनके कोई संतान नहीं थी। उन्होंने जीतू व रागिनी दो बच्चों को गोद ले रखा था। घटना के बाद पत्नी कमला देवी और दोनों बच्चे बेहाल दिखे। ग्रामीणों में घटना के बाद से आक्रोश है।
उन्होंने कहा कि एंबुलेंस समय पर पहुंच जाती तो महेश की जान बच सकती थी। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
कॉल कंट्रोल रूम को प्राप्त होती है
इटावा के एंबुलेंस सेवा प्रभारी राहुल यादव ने बताया कि 108 व 102 एंबुलेंस सेवा के लिए कॉल करने पर सीधा कॉल कंट्रोल रूम को प्राप्त होता है। इसके बाद एंबुलेंस चालक को सूचित किया जाता है। एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची है तो कॉल करने वाले व्यक्ति के मोबाइल फोन नंबर से ही पता चल सकेगा कि किस समय कॉल किया गया। वह कंट्रोल रूम को प्राप्त हुआ या नहीं। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।


