आंध्र प्रदेश सरकार जल्द ही तिरुमला में एक अत्याधुनिक खाद्य प्रयोगशाला शुरू करने जा रही है, ताकि प्रसाद और श्रद्धालुओं को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस सुविधा की एक खास विशेषता फ्रांस से 3.5 करोड़ रुपये की लागत से ई-टंग और ई-नोज मशीनों का आयात होगा। ये मशीनें घी की गुणवत्ता में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों का भी पता लगाने में सक्षम हैं।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव ने बताया कि 25 करोड़ रुपये की लागत से यह प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है, जिसमें प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले लगभग 60 कच्चे पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए उन्नत उपकरण लगाए जाएंगे। इनमें घी, काजू, किशमिश, बादाम, चना, चीनी, इलायची, हल्दी और मिर्च पाउडर शामिल हैं।
गुणवत्ता में जरा-सी भी गिरावट इन मशीनों से पकड़ी जा सकती है। प्रयोगशाला का निर्माण कार्य 90% पूरा हो चुका है और इसके संचालन की शुरुआत अगले महीने होने की उम्मीद है, जबकि उपकरणों की स्थापना मई तक हो जाएगी। यह प्रयोगशाला 8 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली में राज्य स्वास्थ्य विभाग और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के बीच हुए समझौते के बाद स्थापित की जा रही है।
लैब पर कितने होंगे खर्च
एफएसएसएआई ने इस परियोजना के लिए 23 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। यह प्रयोगशाला तिरुमला में 12,000 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाली दो-मंजिला नये इमारत में बनाई जा रही है। 50 अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित यह प्रयोगशाला सूक्ष्म जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और संवेदी विश्लेषण (सेंसरी एनालिसिस) से जुड़े परीक्षण करेगी।
यह खाद्य पदार्थों और पानी के नमूनों में 200 प्रकार तक के कीटनाशक अवशेष, भारी धातुएं, सूक्ष्मजीव और एंटीबायोटिक के अंशों का पता लगाने में सक्षम होगी। टीटीडी के पानी और प्रसादम के नमूनों की भी नियमित जांच की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के लगभग 40 कर्मचारी इस प्रयोगशाला का संचालन करेंगे।
लैब की क्यों पड़ी जरुरत
2024 में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दुनिया के सबसे समृद्ध हिंदू मंदिर में घी में मिलावट का खुलासा किया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस आरोप की जांच के लिए सीबीआई के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया।
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच प्रसादम बनाने में लगभग 250 करोड़ रुपये मूल्य का मिलावटी घी कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया, जिसे कई वर्षों तक बड़ी मात्रा में आपूर्ति किया गया।
जांच के घेरे में प्रसाद
अदालत की निगरानी में हुई इस जांच में, जिसमें केंद्र और राज्य एजेंसियां शामिल थीं, पूर्व तिरुपति मंदिर बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ की गई और खरीद से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।


