जम्मू-कश्मीर के डिग्री कालेजों में अंडर ग्रेजुएट में प्रवेश लेने के बजाय विद्यार्थियों का रुख अन्य राज्यों की ओर हो रहा है। यह रुझान पिछले पांच छह साल से अधिक देखने को मिल रहा है। साथ ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों के पांच वर्ष के एकीकृत कोर्स करने की तरफ विद्यार्थियों की रुचि बढ़ गई है।
जम्मू कश्मीर में कुल 143 डिग्री कालेज हैं। सरकार ने और डिग्री कालेज खोलने के बजाय पहले से स्थापित कालेजों में ढांचागत सुविधाएं मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। जम्मू-कश्मीर में डिग्री कालेजों में सीटों के मुकाबले में पचास प्रतिशत सीटें ही पिछली बार भर पाई थी।
हालत यह हो गई है कि गैर प्रोफेशनल कोर्स बीए, बीकाम, बीएससी करने के लिए भी विद्यार्थियों का रुख अन्य राज्यों की ओर हो गया है। सरकार के अनुसार पिछले अकादमिक सत्र 2025 में कुल 45438 छात्रों ने प्रवेश लिया। प्रदेश के सभी सरकारी डिग्री कालेजों में कुल स्वीकृत सीटों की संख्या 116767 है। इस प्रकार दाखिलों की संख्या उपलब्ध कुल सीटों से काफी कम है। करीब 61 प्रतिशत सीटें खाली रह गई थी।
प्रतिस्पर्धी शिक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहेगा ध्यान
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फिलहाल नए डिग्री कालेज खोलने की संभावना से इनकार किया है। वर्तमान परिस्थितियों में केंद्र शासित प्रदेश में नए डिग्री कालेज खोलने की कोई तत्काल या अनिवार्य आवश्यकता नहीं है। मौजूदा समय में प्राथमिकता मौजूदा बुनियादी ढांचे के बेहतर उपयोग, शैक्षणिक सुविधाओं के उन्नयन, नामांकन स्तर में और सुधार तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी शिक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्रित रहेगा।
बताते चलें कि सीयूईटी-यूजी की अहमियत अब जम्मू व श्रीनगर शहर या कुछ जिला मुख्यालयों पर पुराने प्रतिष्ठित कालेजों में दाखिला के लिए ही रह गई है। उच्च शिक्षा विभाग सीटों को भरने के लिए इस बार करीब अस्सी कालेजों की सूची जारी करेगा जिनमें सीयूईटी-यूजी की जरूरत नहीं होगी।
24 कॉलेजों का निर्माण कार्य जारी
अगर सरकार ने समय रहते डिग्री कालेजों में व्यापक ढांचागत सुविधाओं में सुधार नहीं किया तो आने वाले समय में स्थिति विकट हो जाएगी। युवाओं का बाहरी राज्यों की तरफ ट्रेंड बढ़ता ही जा रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू का कहना है कि साल 2019 में स्वीकृत 50 नए डिग्री कालेजों में से आठ कालेजों की इमारतें पूरी हो चुकी हैं और 24 कॉलेजों का निर्माण कार्य जारी है, जिनमें से आठ कालेज अंतिम चरण में हैं।
मंत्री ने कहा कि डिग्री कालेजों व विश्वविद्यालयों का ढांचा मजबूत करने के लिए रूसा वन और रूसा टू के तहत 35 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पीएम-उषा योजना के तहत 18 नई परियोजनाओं को 155 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत के साथ मंजूरी दी गई है, जिनमें जम्मू-कश्मीर के नौ डिग्री कॉलेज और सात लड़कियों के हॉस्टल का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकारी डिग्री कालेजों में 58 विशेष अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम उपलब्ध हैं और 65 कालेजों को 2025 में 153 अतिरिक्त पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति दी गई है।


