धनबाद की राजनीति में माफिया का प्रभाव कोई नई बात नहीं है। यह भी कहा जाता है कि यहां की राजनीति और माफिया एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। माफिया ताकतों की मंशा हमेशा यह रही है कि राजनीति उनके नियंत्रण में रहे।
माफिया ताकत जनप्रतिनिधि बनकर सत्ता हासिल करते हैं और उसी ताकत के बल पर धनबाद कोयलांचल में कोयला, लोहे के कारोबार और ठेका-पट्टी को नियंत्रित कर आर्थिक लाभ उठाते हैं। इसमें पुराने स्थापित माफिया से लेकर नए चेहरे तक शामिल हैं। हालांकि चुनाव जीतने के बाद माफिया और मजबूत हो जाते हैं, लेकिन आम जनता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।
धनबाद नगर निगम चुनाव का प्रचार जैसे-जैसे तेज हो रहा है, माफिया की चर्चा भी जोर पकड़ रही है। इसकी वजह झरिया के बहुचर्चित विधायक रहे दिवंगत सूरजदेव सिंह के पुत्र और झरिया की भाजपा विधायक रागिनी सिंह के पति, पूर्व विधायक संजीव सिंह का मेयर पद का चुनाव लड़ना है।
संजीव सिंह के खिलाफ धनबाद के सांसद ढुलू महतो लगातार हमलावर हैं। वे धनबाद से माफिया को खत्म करने की बात करते हैं। हालांकि ढुलू महतो पर भी दबंगई के आरोप लगते रहे हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि संजीव सिंह और ढुलू महतो दोनों ही भाजपा की छतरी तले राजनीतिक ताकत हासिल करते रहे हैं।
धनबाद नगर निगम का चुनावी रण अब उफान पर है। प्रत्याशियों का जनसंपर्क अभियान तेज हो गया है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो चुका है। पहले कांग्रेस और झामुमो के बीच बयानबाजी सामने आई थी, अब भाजपा के भीतर ही वाकयुद्ध छिड़ गया है। ताजा मामला सांसद ढुलू महतो और मेयर पद के प्रत्याशी संजीव सिंह के बीच का है। दोनों नेताओं के बीच जारी बयानबाजी शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सांसद का दावा-धनबाद में आ सकती है अशांति
भाजपा सांसद ढुलू महतो ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग चुनाव मैदान में हैं, जो यदि जीत गए तो धनबाद में अशांति फैल सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता सब जानती है, लेकिन लोग डरे हुए हैं।


