प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर के पहले इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ELF) पर भारतीय वायुसेना के C-130J सुपर हरक्युलिस विमान से उतरकर एक बार फिर इस खास विमान की क्षमता दिखा दी। यह मजबूत टर्बोप्रॉप ट्रांसपोर्ट विमान कठिन और उंचाई वाले इलाकों में काम करने के लिए जाना जाता है, जो भारत जैसे देश के लिए बेहद अहम है।
भारत ने अमेरिका से कुल 12 C-130J विमान खरीदे हैं। पहले 6 विमान 2008 में मिले थे, जबकि बाकी के छह 2011 से 2019 के बीच आए। इन्हें दुनिया के सबसे भरोसेमंद टैक्टिकल एयरलिफ्टर में गिना जाता है।
C-130J की खासियत
- यह विमान छोटी और कच्ची हवाई पट्टियों पर भी आसानी से उड़ान भर सकता है और उतर सकता है।
- लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे ऊंचे और दुर्गम इलाकों में यह बेहद उपयोगी है, जहां रनवे छोटे और चुनौतीपू्ण होते हैं।
- लद्दाख का दौलत बेग ओल्डी एयरस्ट्रिप समुद्र तल से लगभद 16 हजार 614 फीट की ऊंचाई पर है और इसे दुनिया के सबसे कठिन एयरस्ट्रिप में माना जाता है।
- इतनी ऊंचाई और कठिन हालात में काम करने की C-130J की क्षमता भारतीय वायुसेना के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
- C-130J सिर्फ माल ढोने वाला विमान नहीं है, बल्कि यह मल्टी-रोल विमान है।
- यह स्पेशल ऑपरेशन जैसे मिशन भी कर सकता है और हवाई ईंधन भरने की मदद से लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है।
- इसका इस्तेमाल पैराड्रॉप ऑपरेशन, सर्च एंड रेस्क्यू (SAR) मिशन और प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत सामग्री पहुंचाने में भी किया जाता है।


