जालंधर में 300 करोड़ की लागत से अपग्रेड होगी DMU शेड, वंदे भारत एक्सप्रेस की मेंटनेंस भी यही होगी
1969 में बना पंजाब का डीजल मोटर यूनिट (डीएमयू) को करीब 300 करोड़ रुपये की लागत के साथ हाईटेक रूप दिया जाएगा। जिसे लेकर करीब सवा साल पहले से चलती आ रही प्लानिंग और प्रस्तावों पर रेलवे बोर्ड की तरफ से चंद दिन पहले ही मोहर लगा कर हरी झंडी दे डाली है। जिसके बाद इस शेड में अब केवल डीएमयू के डीजल व इलेक्ट्रिकल मोटर यूनिट (ईएमयू) इंजनों की ही नहीं बल्कि शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के इंजनों की रिपेयर के साथ-साथ उनकी मेंटनेंस भी होगी।
ये सुविधाएं शुरू होने के साथ ही ये नार्दर्न रेलवे का पहला डीपो भी बन जाएगा। मौजूदा समय में वंदे भारत और शताब्दी के इंजनों को लखनऊं में मेंटनेंस की जाती है। इस प्रोजेक्ट के विस्तार होने के साथ ही भविष्यवादी योजनाओं के तहत साथ-साथ अपडेट भी किया जाता रहेगा।
450 मीटर लंबा ट्रैक तैयार किया जाएगा, क्वार्टरों को तोड़ा जाएगा
इस शेड को इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो के लिए लगभग 450 मीटर लंबा ट्रैक चाहिए। जिससे इसका डिजाइन पूरी तरह से बदला जाएगा। वहीं डीएमयू शेड के आगे वाले हिस्से व 40 क्वार्टर चौक से संत नगर फाटक तक जाने वाले एरिया में पड़ते रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टरों को तोड़ कर एरिया कवर किया जाएगा।
जिसके लिए नई रेल लाइन तक बिछाई जाएगा। इसके तैयार होने से ट्रेनों के संचालन भी बेहद आसान और सुघम होगा। क्योंकि शताब्दी व वंदे भारत जैसे रेल गाड़ियों को अभी भी बीच-बीच में एक-एक दिन मेंटनेंस के लिए भेज कर दोबारा चलाया जाता है। इसके लिए जालंधर पंजाब ही नहीं जेएंडके और हिमाचल को रेल मार्ग से जोड़ने की है कड़ीउत्तर रेलवे जोन में जालंधर स्टेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण स्थान है कि क्यूं पंजाब का पहला डीएमयू शेड मौजूद है।
यहीं से निकलने वाली रेल लाइन केवल पंजाब ही नहीं बल्कि जेएंडके के साथ-साथ हिमाचल के रेल संचालन को भी जोड़ती है। जहां पहले ही डीएमयू, ईएमयू ट्रेनों की मरम्मत, रखरखाव को लेकर संचालन किया जा रहा है। कोचिंग ट्रेनों की रेक मेंटेनेंस स्थानीय स्तर पर होगी, तो फाल्ट्स आने की सूरत में तुरंत उसकी रिपेयरिंग भी संभव हो जाएगा। जहां पर आने वाले समय में मेल, एक्सप्रैस ट्रेनों के कोचों का भी निरीक्षण, सफाई, मुरम्मत आदि तकनीकी कार्य किए जाएंगे। इस इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में आधुनिक उपकरणों, आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था यही होगी।


