उत्तराखंड में चला यूपी के सीएम का जादू, पहाड़ के सियासी और सामाजिक मर्म को छू गए योगी आदित्यनाथ

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प्राचीन शिव मंदिर यमकेश्वर से पूजा अर्चना के बाद बाहर निकले यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ जब सीएम धामी के साथ जनता इंटर कालेज के भवन लोकार्पण के मंच पर पहुंचे तो बेहद आत्मयिता के साथ लोगों से मिलते रहे। ठीक एक साल पहले जब सीएम योगी अपने गृह क्षेत्र पहुंचे तो उनके मन में पहाड़ का वो मर्म था, जिसे उन्होंने छुआ था। इस बार इस पीड़ा के साथ वह राजनैतिक संदेश भी देते नजर आए।

एक साल पहले जब योगी आए थे तब उनका संबोधन करीब 14 मिनट चला। इस बार वह करीब तीस मिनट बोले। पलायन, सांस्कृतिक राजनैतिक तमाम पहलु को वह छूते नजर आए। मंदिर नहीं जाने पर आशीर्वाद न मिलने को लेकर उनका संबोधन अप्रत्यक्ष तौर पर यूपी की सियासत को लेकर आंका जा रहा है। गोत्र बताने की परंपरा से लेकर बचपन के दिनों की याद को उकेरा।

आज विधायक सबको पहचान रही, पहले दिखते ही नहीं थे

सीएम योगी ने कहा कि एक दौर में गांव में विधायक, सांसद केवल चुनाव के समय में दिखते थे। आज विधायक एक महीने न आए तो लोग आंख लाल, पीली करने लगने हैं। आज यहां की विधायक एक-एक का नाम लेकर बुला रही थी। हर कार्य के लिए सरकार को दोष देना ठीक नहीं है। जब हम बचपन में थे तब एक माह में एक बार केरोसिन मिल जाए, यह बहुत होता था। खुशहाल जीवन और साौहर्दपूर्ण समय था। अब जब कलह देखते हैं, तो यह विकास भौतिकता से उपजी नकारात्मकता है।

उत्तराखंड के पास बहुत अवसर

सीएम योगी बोले, प्रयास करने से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता। उत्तराखंड के पास बहुत अवसर हैं। करीब 45 साल पहले वह इस इंटर कालेज में आए थे। तब वह बाल्याकाल में थे। गढ़वाली और कुमाउनी लोक गीत के कार्यक्रम चल रहे थे। सीएम योगी ने कहा कि तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत के कहने पर कोरोना काल में कोटा से देहरादून और हल्द्वानी तक छात्र भेजे थे।

पैतृक गांव में गुजारी रात

सीएम योगी रात्रि विश्राम के लिए अपने पैतृक गांव पंचूर पहुचे। उनकी वयोवृद्ध माता सावित्री देवी गांव में रहती हैं। हालांकि, निजी कार्यक्रम के चलते यहां बाकी लोगों की एंट्री नहीं थी। शनिवार सुबह यहां से रवाना हो गए।

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