चाबहार पर अमेरिकी नीतियों के प्रभावों को दूर करने सभी पक्षों से वार्ता जारी, संबंधित पक्ष लगातार संपर्क में

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 सरकार ने गुरुवार को संसद को बताया कि वह चाबहार परियोजना में भारत की भागीदारी पर अमेरिकी प्रतिबंधों या टैरिफ नीतियों में हाल ही में हुए बदलावों के प्रभावों को दूर करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ ”लगातार संपर्क में” है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से पूछा था कि क्या उसने ऐसे परिणामों का आकलन किया है। कांग्रेस नेता ने पिछले पांच वर्षों में ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना के विकास और संचालन पर भारत द्वारा आवंटित धनराशि और खर्च की गई राशि के बारे में भी पूछा था।

विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में कहा, ”13 मई 2024 को चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल को सुसज्जित करने और संचालित करने के लिए इंडिया पो‌र्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन के बीच हस्ताक्षरित मुख्य अनुबंध के अनुसार, भारत ने बंदरगाह से संबद्ध आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए 12 करोड़ डालर का योगदान करने की अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है।”

उन्होंने आगे बताया कि अंतिम किश्त 26 अगस्त, 2025 को हस्तांतरित की गई थी। खरगे ने विदेश मंत्रालय से यह भी पूछा था कि क्या पिछले दो वर्षों में चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत की भागीदारी के संबंध में अमेरिका या अन्य संबंधित साझेदारों के साथ कोई राजनयिक बातचीत हुई थी।

उन्होंने परियोजना में भारत की भागीदारी जारी रखने के लिए विचाराधीन ”आपातकालीन योजनाओं” का विवरण मांगा था। ईरान में हालात पर कड़ी नजर एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कीर्ति वर्धन सिंह ने यह भी कहा कि सरकार ईरान में हालात पर कड़ी नजर रख रही है और हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान किसी भारतीय नागरिक के लापता होने या मारे जाने की कोई खबर नहीं है।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ईरान में छात्रों सहित भारतीय नागरिकों के साथ नियमित संपर्क में है और उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है। यूएस से 3,800 भारतीय निर्वासित सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को सूचित किया कि 2025 में अमेरिका से 3,800 से अधिक भारतीय नागरिकों को निर्वासित किया गया।

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