बिहार सरकार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को राज्य का बजट पेश किया, जिसमें मत्स्य पालन, उत्पादन और क्रय-विक्रय पर विशेष जोर दिया गया। खगड़िया जिले को मछली उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। जिले में खगड़िया नदी और इसके जलाशयों में प्रचुर मात्रा में मछलियां पाई जाती हैं, जिनमें कई विलुप्तप्राय प्रजातियां भी शामिल हैं। मोई और बघार जैसी मछलियां यहां विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। बघार फ्रेश वाटर की सबसे बड़ी मछली है और इसका वजन 200 किलो तक होता है।
जिले में करीब 200 प्रकार की मछलियां पाई जाती हैं। इसमें मेडिसिनल फिश जैसे सिंगी भी शामिल हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में खगड़िया में मछली उत्पादन 38.88 हजार मीट्रिक टन दर्ज किया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 का लक्ष्य लगभग 39 हजार मीट्रिक टन रखा गया है। सूखी मछलियों का कारोबार भी बड़े पैमाने पर होता है और ये मुख्य रूप से अन्य राज्यों में भेजी जाती हैं।
- खगड़िया जिले से होकर गुजरने वाली नदियों की लंबाई 245 किलोमीटर है।
- कुल सरकारी जलकर 180 है।
- जिले में चौर भूमि 20 हजार हेक्टेयर है।
- दो सौ प्रकार की मछलियां पाई जाती हैं।
- फ्रेश वाटर की सबसे बड़ी मछली बघार भी पाई जाती है।
खगड़िया में सात प्रखंड हैं और इन प्रखंडों में सात मत्स्यजीवी सहयोग समितियां काम कर रही हैं। जिला मत्स्य पदाधिकारी लाल बहादुर साफी के अनुसार इन समितियों के करीब 32 हजार सदस्य सीधे तौर पर मछली कारोबार से जुड़े हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से इससे बड़ी संख्या में लोग जुड़ते हैं। अर्थशास्त्री डा. अनिल ठाकुर का कहना है कि खगड़िया मछली के लिए प्रसिद्ध है और इस बजट से यहां के मछली कारोबार को मजबूती मिलेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया impulso मिलेगा।
मछली उत्पादन का आंकड़ा (हजार मीट्रिक टन)
2020-21: 26.92 2021-22: 31.03 2022-23: 34.46 2023-24: 36.51 2024-25: 38.88
खगड़िया से मछलियां पश्चिम बंगाल, असम और पंजाब तक भेजी जाती हैं। जिला में सड़क और रेल दोनों मार्गों से मछली की आवाजाही होती है। जिले की नदियों की कुल लंबाई 245 किलोमीटर है। सरकारी जलकर 180 और चौर भूमि 20 हजार हेक्टेयर है।


