कैंसर का नाम सुनते ही आमतौर पर लोग डर से सिहर उठते हैं। यह बीमारी अक्सर मौत का पर्याय मानी जाती है, लेकिन हौसले और जज्बे के आगे कैंसर भी घुटने टेक सकता है। इलाज जितना जरूरी है, उतनी ही अहम भूमिका मरीज की मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच निभाती है।
इसी साहस और आत्मविश्वास की जीवंत मिसाल हैं 46 वर्षीय मनीष कुमार वर्मा, जो उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के करारी कसबा के निवासी हैं। मनीष ने न सिर्फ ब्लड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात दी, बल्कि जिंदगी से हार मान चुके कई कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे।
जिंदगी की जंग जीतने की मुहिम
कैंसर से जंग जीतने के बाद मनीष वर्मा ने इस बीमारी के खिलाफ जागरूकता और सहयोग की एक मुहिम शुरू की। उनके मार्गदर्शन और सहयोग से अब तक 12 कैंसर मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर नई जिंदगी जी रहे हैं। बीते 27 वर्षों में उन्होंने 700 से अधिक मरीजों के इलाज की राह को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आज मनीष वर्मा उन लोगों के लिए देवदूत साबित हो रहे हैं, जो कैंसर से जूझते हुए उम्मीद खो चुके होते हैं। उनका जीवन संघर्ष और सेवा भावना यह संदेश देती है कि कैंसर लाइलाज नहीं, बल्कि हिम्मत और सही मार्गदर्शन से हराया जा सकता है।


