109 बसों के सहारे 15 लाख लोग: पलवल की परिवहन व्यवस्था बेहाल, ‘नाइट चार्ज’ के नाम पर निजी वाहनों की मनमानी

2.7kViews
1394 Shares

जिले में इस समय परिवहन व्यवस्था का बड़ा संकट है। चरमराई हुई परिवहन व्यवस्था के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना आवागमन के लिए जिले की 15 लाख से अधिक की आबादी सिर्फ 109 रोडवेज बसों और 15 ट्रेनों पर ही निर्भर है। रात के समय तो रोडवेज बसें सड़कों पर दिखना ही बंद हो जाती हैं।

चरमराई हुई सरकारी परिवहन व्यवस्था की कमी के कारण यात्री मजबूरी में निजी वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। यह निजी वाहन यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर नाइट चार्ज के नाम पर मनमाना किराया वसूलते हैं।

रात के समय सरकारी बसें न होने से यात्रियों से 20 प्रतिशत तक ज्यादा किराया वसूला जाता है। उल्लेखनीय है कि बीते 15 वर्षों में जिले की आबादी तेजी से बढ़ी है। पलवल जिला कनेक्टिविटी के मामले में बड़े-बड़े शहरों को पछाड़ रहा है।

नहीं बढ़ाई जा सकी परिवहन सेवाएं

लेकिन इस बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ती आबादी के अनुरूप परिवहन सेवाएं नहीं बढ़ाईं जा रही हैं और कई वर्ष पहले के हिसाब से भी रोडवेज बसें जिले में उपलब्ध नहीं हैं। कई वर्ष पहले इस समस्या से निपटने के लिए जिले में केएमपी-केजीपी इटरचेंज के समीप अंतरराज्यीय बस अड्डा बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया था, लेकिन यह सिरे नहीं चढ़ सका।

 

अनुमान के मुताबिक जिले की 15 लाख से अधिक की आबादी है। यह आबादी सिर्फ 109 हरियाणा रोडवेज बसों के भरोसे है। वहीं कोविड महामारी से पहले सुबह शाम 38 ईएमयू व 12 एक्सप्रेस ट्रेनें संचालित होती थी। मगर कोविड के बाद मात्र 24 ईएमयू तथा छह एक्सप्रेस ट्रेनें ही स्टेशन पर चल रही हैं।

कोविड के बाद से ज्यादातर ट्रेनें बंद पड़ी हैं। परिवहन व्यवस्था की कमी का सबसे ज्यादा असर लोकल रूटों पर पड़ रहा है। शाम पांच बजे के बाद तो रोडवेज बसें लोकल रूटों पर दिखनी ही बंद हो जाती है।

नौकरीपेशा और दिल्ली- एनसीआर में पढने वाले छात्रों को इसका सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ता है। इसी का फायदा निजी बस उठा रही हैं।

बस डिपो में बसों की किल्लत

कई वर्षो से पलवल रोडवेज बस डिपो में बसों की किल्लत है। लगातार बसें कंडम घोषित हो रही है और नई बसें बेहद ही कम मात्रा में आ रही हैं। साथ ही बस डिपो पर चालक और परिचालकों की भी भारी कमी है। पलवल रोडवेज बस डिपो पर सिर्फ 109 बसें ही संचालित हो रही हैं। जबकि डिपो पर 200 से ज्यादा बसों की आवश्यकता है।

वहीं पलवल बस डिपो पर स्टाफ की संख्या भी बेहद कम है। डिपो पर मौजूद बसों के लिए 134 चालक उपलब्ध हैं, जबकि डिपो पर 200 से ज्यादा चालकों की आवश्यकता है। डिपो पर परिचालक भी पूरी मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं।

निजी वाहन चलाने वाले उठा रहे फायदा

सरकारी बसों के न चलने का सीधा फायदा प्राइवेट बस चालकों और डग्गामार वाहनों को मिल रहा है। शाम छह बजे के बाद निजी बस चालक अपनी मनमानी पर उतर आते हैं और नाइट चार्ज के नाम पर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलते हैं।

कई रूटों पर तय किराए किराए से अधिक पैसा वसूला जा रहा है। यात्री अधिक किराया देने को मजबूर हैं, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। निजी बस द्वारा पलवल से सोहना जाने वाले यात्रियों से 50 रुपए किराया लिया जा रहा है।

जबकि पलवल से सोहना जाने के लिए दिन में 40 रुपए ही किराया लगता है। इसी तरह रात के समय पलवल से बल्लभगढ़, गुरुग्राम, नूंह इत्यादि रूटों के लिए 20 प्रतिशत तक अधिक की वसूली की जाती है। त्योहारी मौसम में तो यह मनमानी और तेज हो जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *