यूनिवर्सिटी से स्किल सेंटर तक, सीतारमण के पिटारे से क्या-क्या निकला? छात्रों की तो निकल पड़ी
देश को 2047 तक विकसित बनाने के लक्ष्य को लेकर बढ़ी केंद्र सरकार ने विकसित देशों की तर्ज पर अब योजनाबद्ध तरीके से पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाने का एलान किया है। जिसमें कई विश्वविद्यालयों से लेकर कालेज, शोध संस्थान, स्किलिंग सेंटर और आवासीय परिसर आदि शामिल होंगे।
इनकी स्थापना राज्यों की मदद से चैलेंज मोड में देश के बड़े औद्योगिक व लाजिस्टिक गलियारों के आसपास की जाएगी, ताकि पढ़ाई के बाद इन परिसरों से निकलने वाले युवाओं को आसपास ही रोजगार मिल सके। इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की शैक्षणिक संस्थान और उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाने की सिफारिश से जोड़कर देखा जा रहा है।
पलायन रोकने में मिलेगी मदद
माना जा रहा है कि इस पहल से पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। यह पहल तब की गई है कि जब दुनिया के विकसित देशों में यूनिवर्सिटी टाउनशिप के सफल उदाहरण मौजूद है। जहां शहर का पूरा इकोसिस्टम विश्वविद्यालय के इर्द-गिर्द विकसित होता है। इनमें ऑक्सफोर्ड व कैम्बि्रज ( यूके) व एन आर्बर (मिशिगन, यूएसए) इसमें शामिल है।
देश में भी पिलानी (राजस्थान), मणिपाल (कर्नाटक ) व वेल्लोर (तमिलनाडु) इस दिशा में बढ़ते कुछ उदाहरण है लेकिन इनका ढांचा अभी काफी कमजोर है। वहीं उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में कुछ पहल शुरू हुई है लेकिन जमीनी रूप नहीं ले पायी है।
ऐसे में बजट में विश्वविद्यालय टाउनशिप की इस घोषणा से देश में विकसित हो रहे ऐसे क्षेत्रों को और गति मिलेगी। बजट में की गई विश्वविद्यालय टाउनशिप की इस घोषणा को देश में शहरी विकास के एक नए इंजन के रूप में भी खड़ा करने की पहल दिख रही है। जहां रहने की बेहतर सुविधा के साथ पढ़ाई, शोध व स्किलिंग की पूरी व्यवस्था होगी।
क्या-क्या होगा फायदा?
यानी वहां से निकलने के बाद वह पास में ही अच्छी नौकरी पाने के काबिल होंगे। वहीं शैक्षणिक संस्थान भी अपने आसपास के उद्योगों की मांग के मुताबिक नई पीढ़ी को तैयार कर सकेंगे। विश्वविद्यालय टाउनशिप की इस घोषणा से सरकार के कई लक्ष्य भी सधते हुए दिख रहे है।
इनमें पहला एनईपी की बहुविषयक शैक्षणिक परिसर बनाने की सिफारिश, दूसरा उद्योगों के साथ तालमेल बढ़ाने की पहल, तीसरी एक ऐसी टाउनशिप को विकसित करना है, जहां सारी मूलमूल सुविधाएं के साथ ही वह आर्थिक गतिविधियों को केंद्र भी हो।


