नई दिल्ली: सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों का सीधा संबंध साबित करने के लिए वर्तमान में कोई पुख्ता डेटा उपलब्ध नहीं है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित उत्तर में कहा कि मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) सकारात्मक परिणाम दिखा रहा है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस समय ऐसा कोई ठोस डेटा नहीं है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी व्यक्ति की मौत केवल वायु प्रदूषण के कारण हुई है। उन्होंने कहा, “कोई पुख्ता डाटा नहीं है जिससे वायु प्रदूषण और मृत्यु के बीच सीधे संबंध को साबित किया जा सके।”
कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि एनसीएपी का उद्देश्य 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रदूषण नियंत्रण उपायों और निगरानी तंत्रों को लागू किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि 2024-25 में 103 शहरों में पीएम10 प्रदूषण में कमी दर्ज की गई है, जिसका आधार वर्ष 2017-18 था। यह कदम वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में सरकार की निरंतर पहल को दर्शाता है।
इसके साथ ही, उन्होंने बताया कि सरकार एनसीएपी के कार्यान्वयन ढांचे की निरंतर समीक्षा और निगरानी कर रही है, ताकि इस कार्यक्रम को और मजबूत और प्रभावी बनाया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और मौतों का सीधा संबंध स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इसमें अन्य पर्यावरणीय और स्वास्थ्य कारक भी प्रभाव डालते हैं। हालांकि, पीएम10 और पीएम2.5 जैसे सूचकांक में कमी यह संकेत देती है कि वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।


