अक्सर देखा जाता है कि बैंक से जुड़े कई काम लंबे समय तक अटके रहते हैं। चाहे खाते में गलती हो, चार्ज की कटौती, लोन या क्रेडिट कार्ड की समस्या, पेंशन और सब्सिडी से जुड़ा मामला या फिर केवाईसी अपडेट—ग्राहक को बार-बार बैंक जाना पड़ता है, लेकिन समाधान नहीं मिलता।
मौखिक शिकायतों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है और मामले को टाल दिया जाता है। ऐसी स्थिति में ग्राहक असहाय महसूस करता है। जबकि बैंकिंग नियमों के अनुसार हर ग्राहक को शिकायत दर्ज करने और उसका समाधान पाने का पूरा अधिकार है।
ऐसे में जरूरी है कि ग्राहक यह जानें कि शिकायत किसे और किस तरीके से करनी चाहिए ताकि समस्या का समाधान समय पर मिल सके।


