राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत का गणतंत्र दिवस पर मुजफ्फरपुर प्रवास संघ कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर उत्तर बिहार प्रांत के 31 सांगठनिक जिलों से हर स्तर के संघचालक शामिल होंगे। संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्वयंसेवकों में गहरी उत्सुकता और जोश देखा जा रहा है।
मुजफ्फरपुर जिले में आरएसएस की पहली शाखा वर्ष 1939 में प्रारंभ हुई थी। उस समय यह शाखा स्थानीय स्तर पर संगठन की नींव रखने का प्रयास थी, जो धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैलती गई। आज उत्तर बिहार में शाखाओं की संख्या बढ़कर 1200 से अधिक हो चुकी है। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मार्च में होने वाली प्रतिनिधि सभा से पहले इस संख्या को 1500 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में स्वयंसेवक सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं और गांव-गांव, कस्बों और शहरों में शाखाओं के विस्तार का अभियान चलाया जा रहा है।
स्वयंसेवकों में उत्साह मोहन भागवत के आगमन को लेकर स्वयंसेवकों में विशेष उत्साह है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर सरसंघचालक का मुजफ्फरपुर में प्रवास होना संगठन के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। कार्यक्रम में शामिल होने वाले स्वयंसेवक न केवल शाखाओं की उपलब्धियों को साझा करेंगे बल्कि आगामी योजनाओं पर भी चर्चा करेंगे।
शाखाओं का विस्तार और लक्ष्य उत्तर बिहार में शाखाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में 1200 से अधिक शाखाएं सक्रिय हैं, जिनमें विभिन्न आयु वर्ग के स्वयंसेवक प्रतिदिन शारीरिक, मानसिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन ने मार्च तक शाखाओं की संख्या 1500 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए स्वयंसेवक लगातार नए क्षेत्रों में शाखाएं स्थापित कर रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि मुजफ्फरपुर जिले में 1939 में शुरू हुई पहली शाखा ने संगठन की नींव रखी। उस समय से लेकर आज तक संघ ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। शिक्षा, सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक गतिविधियों और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में संघ की भूमिका लगातार बढ़ती रही है।
कार्यक्रम की रूपरेखा गणतंत्र दिवस पर आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उत्तर बिहार प्रांत के सभी 31 सांगठनिक जिलों से संघचालक भाग लेंगे। कार्यक्रम में संगठन की उपलब्धियों, शाखाओं के विस्तार और आगामी योजनाओं पर चर्चा होगी। साथ ही शताब्दी वर्ष के अंतर्गत होने वाले विभिन्न आयोजनों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की जाएगी।
महत्वपूर्ण संदेश मोहन भागवत का यह प्रवास संगठन के लिए प्रेरणादायी माना जा रहा है। स्वयंसेवकों का मानना है कि सरसंघचालक के मार्गदर्शन से शाखाओं के विस्तार और संगठन की गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर यह आयोजन संगठन की राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सेवा की भावना को और मजबूत करेगा।


