हिमालयी राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर—में जंगलों में आग लगना लंबे समय से गर्मियों का एक सामान्य दृश्य रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह पैटर्न बदल रहा है। अब सर्दियों के मौसम में भी जंगलों में आग तेजी से फैल रही है। विशेषज्ञों और वन अधिकारियों का कहना है कि यह कोई असामान्य घटना नहीं रही, बल्कि जलवायु परिवर्तन के कारण बदलते पारिस्थितिक पैटर्न का गंभीर संकेत है।
उत्तराखंड में सबसे अधिक फायर अलर्ट
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) के आंकड़ों के अनुसार, सर्दियों की शुरुआत यानी 1 नवंबर से अब तक उत्तराखंड में देशभर में सबसे अधिक 1,756 ‘फायर अलर्ट’ दर्ज किए गए हैं। यह संख्या महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे उन राज्यों से भी अधिक है, जिन्हें पारंपरिक रूप से जंगलों में आग लगने के लिए संवेदनशील माना जाता है।
हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी आग
उत्तराखंड के बाद अब हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जंगलों में भी आग की घटनाएँ तेजी से सामने आ रही हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों में आग लगना पहले बेहद दुर्लभ था, लेकिन अब यह लगातार देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है। बढ़ते तापमान, बदलते मौसम चक्र और लंबे समय तक शुष्क परिस्थितियाँ जंगलों को अधिक संवेदनशील बना रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
निष्कर्ष
हिमालयी राज्यों में सर्दियों के दौरान जंगलों में आग लगना अब एक नई चुनौती बन गई है। यह न केवल वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के जीवन और आजीविका पर भी असर डाल सकता है। जलवायु परिवर्तन के इस संकेत को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।


