उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाला गौतमबुद्धनगर जिला आपदा प्रबंधन और राहत-बचाव संसाधनों की उपलब्धता के मामले में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत की घटना ने तीनों प्राधिकरणों, जिला प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की तैयारियों की सच्चाई सामने ला दी है।
दो घंटे तक मदद की गुहार निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में युवराज अपनी कार पर खड़े होकर करीब दो घंटे तक जान बचाने की गुहार लगाते रहे। मौके पर मौजूद पुलिस, दमकल कर्मी और एसडीआरएफ की टीम केवल किनारे पर खड़े होकर भागदौड़ करती रही, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
आखिरकार गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम को बुलाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पिता राज कुमार मेहता के सामने ही उनका बेटा युवराज कार समेत पानी में डूब गया। इस घटना ने जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


