जिला संयुक्त चिकित्सालय में गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के समय खून की कमी की समस्या से राहत मिलने वाली है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. अनिल कुमार गुप्ता के निर्देश पर अस्पताल में एनीमिया वार्ड शुरू किया गया है। इस वार्ड में महिलाओं को आवश्यकता पड़ने पर आयरन सप्लिमेंट और खून चढ़ाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पहले गंभीर स्थिति में गर्भवती महिलाओं को खून की कमी होने पर कानपुर या सैफई रेफर करना पड़ता था। अब एनीमिया वार्ड की स्थापना से मरीजों को अस्पताल में ही तुरंत सहायता मिल सकेगी।
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि जिला संयुक्त चिकित्सालय में शहर के अलावा आसपास के करीब 50 से अधिक गांव की महिलाओं को प्रसव के लिए लाया जाता है। एनीमिया वार्ड शुरू होने से इन सभी महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित प्रसव सुविधा मिल सकेगी।
महिला विभाग के अधिकारी ने बताया कि एनीमिया वार्ड में विशेष रूप से उन गर्भवती महिलाओं का इलाज किया जाएगा जिनमें खून की कमी अधिक है। इसके तहत सक्रिय रूप से रक्त परीक्षण, आयरन सप्लीमेंटेशन और आवश्यकतानुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) का समय पर उपचार न होने पर डिलीवरी के दौरान गंभीर खतरे बढ़ सकते हैं। इसलिए जिला संयुक्त चिकित्सालय का यह कदम महिलाओं की सुरक्षा और मातृत्व स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। हाल ही में महिला विभाग में कई अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है, ताकि गर्भवती और प्रसव कराने वाली महिलाओं को उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
अस्पताल प्रशासन का यह भी कहना है कि एनीमिया वार्ड के साथ-साथ अस्पताल में आपातकालीन ब्लड बैंक की भी व्यवस्था है। जिससे खून की कमी वाले मरीजों को तुरंत ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जा सके। इसके साथ ही अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों की विशेष ड्यूटी भी निर्धारित की गई है, ताकि कोई मरीज समय पर मदद से वंचित न रहे।
यह कदम जिले में मातृत्व स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने और महिला रोगियों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के और स्वास्थ्य सुधारों की योजना भी बनाई जा रही है।


