जिला मेडिकल कालेज में संविदा नियुक्ति घोटाला: युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र बांटे गए

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जिला मेडिकल कालेज के अस्पताल में संविदा कर्मियों की नियुक्ति के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पताल में बिना वास्तविक पदों के युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए, जिन्हें देखकर उन्हें लगा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालांकि, जब युवाओं ने अस्पताल में उपस्थित होकर पद ग्रहण करने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी थे।

जानकारी के अनुसार, फर्जी नियुक्ति पत्र वीआरजीआर कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के लेटरहेड पर जारी किए गए थे। यह वही कंपनी है जो महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती करती है। नियुक्ति पत्र में जेएनएम नर्सिंग, असिस्टेंट प्रोफेसर बीएएमएस, फार्मासिस्ट, लैब टेक्निशियन, क्लर्क, हेल्पर और ऑफिस अटेंडेंट जैसे पदों के लिए नियुक्ति का दावा किया गया। लेकिन असल में इन पदों पर कंपनी द्वारा कोई भर्ती प्रक्रिया नहीं की जा रही थी।

चर्चा है कि युवाओं से नियुक्ति पत्र देने के नाम पर एक से तीन लाख रुपये तक की राशि ली गई। हालांकि, अभी तक किसी ने लिखित शिकायत नहीं दी है। अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राचार्य ने कहा कि यह फर्जीवाड़ा शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि संविदा कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले लोग अक्सर युवाओं को लालच देकर उनकी मेहनत और पैसे दोनों का नुकसान कर देते हैं। ऐसे मामलों में सरकार और संबंधित विभागों को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे धोखाधड़ी के मामलों को रोका जा सके।

वीआरजीआर कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। नियुक्ति पत्र केवल वास्तविक पदों पर ही जारी होने चाहिए और उम्मीदवारों को प्रमाणिक दस्तावेज़ दिए जाने चाहिए। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन ने सभी संभावित फर्जी नियुक्ति पत्रों को जब्त कर लिया है और सभी संदिग्धों के खिलाफ जांच की जा रही है।

जिले के युवाओं ने प्रशासन से अपील की है कि ऐसे फर्जीवाड़ों पर सख्त कदम उठाए जाएँ। युवाओं का कहना है कि उनके मेहनत और पैसे का नुकसान केवल धोखाधड़ी के कारण हुआ है। इस मामले की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले ने यह भी उजागर किया कि संविदा कर्मियों की भर्ती में पारदर्शिता और मॉनिटरिंग कितनी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भर्ती प्रक्रिया सही ढंग से संचालित होती है और सभी उम्मीदवारों को सही जानकारी दी जाती है, तो इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सकता है।

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