शहर में बंदरों के बढ़ते उत्पात की आशंका एक बार फिर गहराने लगी है। हालात ऐसे हैं कि अगर कोई नागरिक बंदरों की शिकायत लेकर नगर निगम को फोन करता है, तो उसे मदद से साफ इनकार किया जा रहा है। इसकी वजह यह है कि शासन के निर्देश के बाद नगर निगम ने न केवल बंदरों को पकड़ने का काम बंद कर दिया है, बल्कि इस कार्य में लगी एजेंसी को भी हटा दिया गया है।
दूसरी ओर, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में उन्हें अब तक कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। इससे बंदरों के प्रबंधन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, विशेष सचिव कल्याण बनर्जी की ओर से पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश जारी किए गए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि बंदरों के प्रबंधन की जिम्मेदारी पहले की तरह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पास ही रहेगी। इसके लिए विभाग को एक महीने के भीतर विस्तृत कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करनी होगी। शासन के इस आदेश के बाद नगर निगम ने तत्काल प्रभाव से एजेंसी को बंदरों को पकड़ने के कार्य से रोक दिया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर नगर निगम ने शहर में बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू किया था। इसका मुख्य कारण यह था कि वन विभाग के जिम्मे होने के बावजूद यह कार्य लंबे समय तक प्रभावी रूप से नहीं हो पा रहा था। बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या के चलते शहरवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
अब एजेंसी हटने और जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता न होने से एक बार फिर शहर में बंदरों के उत्पात के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


