प्रखंड के जुरदाग तेतरटोली गांव में मंगलवार को सीडबी बैंक के महिला उद्यमिता आजीविका संवर्धन और विकास कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय इडीपी प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके पारंपरिक कार्यों को नए बाजार से जोड़ना था।
कार्यक्रम में शामिल हुईं प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) स्मिता नगेशिया को ग्रामीणों ने बताया कि गांव की महिलाएं अब पूरी तरह से हड़िया दारू बनाना बंद कर चुकी हैं और अपनी आजीविका के लिए रस्सी निर्माण में जुटी हैं।
नशामुक्त गांव की पहल
गांव के लोगों ने बीडीओ को बताया कि यहां 40 से 45 आदिवासी मुंडा परिवार निवास करते हैं। इस गांव में पिछले 25-30 वर्षों से हड़िया दारू बनाने और बेचने पर पाबंदी लगी हुई है। ग्रामीणों ने नशापान से दूरी बनाकर अपनी आजीविका के लिए वैकल्पिक साधन अपनाए हैं।
रस्सी निर्माण से आजीविका
गांव के अधिकांश परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन प्लास्टिक की बोरी से रस्सी बनाना है। महिलाएं इस कार्य से अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। हालांकि, बाजार में रस्सी की पर्याप्त बिक्री और उचित मूल्य न मिलने के कारण गांव का जीवन स्तर सुधार नहीं पा रहा है।
प्रशिक्षण और योजनाओं पर चर्चा
कार्यक्रम में सीडबी के वी-लीड प्रोजेक्ट और सरकार की योजनाओं के माध्यम से रस्सी निर्माण कार्य को बढ़ावा देने तथा नए बाजार उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि महिलाओं को प्रशिक्षण और विपणन सहयोग देकर उनकी आजीविका को सशक्त बनाया जाएगा।
महत्व
- महिलाओं ने नशे से दूर रहकर आत्मनिर्भरता की राह चुनी।
- रस्सी निर्माण को बढ़ावा देने से गांव की आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना।
- सरकारी योजनाओं और सीडबी प्रोजेक्ट से महिलाओं को नए अवसर मिलेंगे।


