सीतामढ़ी जिले में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा पदाधिकारी राघवेन्द्र मणि त्रिपाठी ने मंगलवार को प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) कार्यालय में अनुपस्थित थे। यह स्थिति प्रशासनिक जिम्मेदारी और कार्यकुशलता पर सवाल खड़े करती है।
अवैध वसूली की शिकायत
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि एक प्रतिनियोजित शिक्षक शिक्षकों की उपस्थिति विवरणी उपलब्ध कराने के साथ-साथ नवपदस्थापित प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षक के सरकारी खातों में हस्ताक्षर परिवर्तन के नाम पर अवैध राशि वसूली कर रहा था। इस शिकायत को जिला शिक्षा पदाधिकारी ने गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल संज्ञान लिया।
कार्रवाई के निर्देश
डीईओ ने संबंधित बीईओ को 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया है। साथ ही निरीक्षण में यह भी स्पष्ट हुआ कि मो. अशरफ कमाल का बीआरसी में किया गया प्रतिनियोजन नियमसम्मत नहीं था।
इस पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से प्रतिनियोजन रद्द कर दिया और आदेश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर अपने मूल विद्यालय मध्य विद्यालय विशनपुर लौटकर योगदान से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
मध्याह्न भोजन योजना पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग ने मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े कार्यों पर भी सख्त रुख अपनाया। विभाग ने स्पष्ट किया कि योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइया-सह-सहायक से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त कार्य नहीं लिया जाएगा।
मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रसोइयों को केवल योजना से संबंधित कार्य ही सौंपे जाएं और उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियों से मुक्त रखा जाए।
महत्व और असर
यह निरीक्षण शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- बीईओ की अनुपस्थिति और अवैध वसूली की शिकायत ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया।
- प्रतिनियोजन रद्द करने का निर्णय नियमों के पालन और अनुशासन को मजबूत करेगा।
- मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े निर्देश रसोइयों के अधिकारों की रक्षा करेंगे और योजना की गुणवत्ता को बनाए रखेंगे।
जिला शिक्षा पदाधिकारी की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


