हरियाणा की ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया 40 प्रतिशत कोरम का नियम अब सरकार और सरपंचों के बीच सीधी टकराहट का कारण बन गया है।
सरकार का कहना है कि यह नियम ‘ग्राम संसद’ को मजबूत करने की पहल है, जबकि सरपंच इसे गांवों के विकास पर ब्रेक मान रहे हैं।
सरपंचों का तर्क
- कई जिलों की सरपंच एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की 35% पंचायतों में ग्राम सभा के नए कोरम नियम के कारण विकास प्रस्ताव तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
- सरपंच संगठनों का कहना है कि जिन गांवों में सरपंच का चुनाव 15-25 प्रतिशत मतों से हुआ है, वहां ग्राम सभा में 40 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करना जमीनी हकीकत से परे है।
सरकार का पक्ष
सरकार का मानना है कि ग्राम सभा में अधिक उपस्थिति से निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी और लोकतांत्रिक होगी। इससे पंचायतों में जवाबदेही बढ़ेगी और जनता की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
असर
यह नियम पंचायतों में विकास कार्यों की गति को प्रभावित कर रहा है। जहां सरकार इसे लोकतांत्रिक मजबूती बता रही है, वहीं सरपंच इसे व्यवहारिक कठिनाई मान रहे हैं।


