भारत बना मेडिकल टूरिज्म का हब, 2026 तक 13 अरब डॉलर का लक्ष्य

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पश्चिमी देशों की तुलना में कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के कारण भारत तेजी से मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है। वर्तमान में देश प्रौद्योगिकी में प्रगति, स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे के विस्तार और किफायती चिकित्सा देखभाल पर विशेष ध्यान दे रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक भारत मेडिकल टूरिज्म बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए लगभग 13 अरब डॉलर का आंकड़ा छू लेगा।

उन्नत स्वास्थ्य सेवा ढांचा

भारत अपनी स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए भारी निवेश कर रहा है। अस्पतालों और विशेष चिकित्सा केंद्रों की संख्या बढ़ाने की योजनाएं चल रही हैं। साथ ही, आधुनिक तकनीक को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2030 तक भारत में एआई-आधारित निदान, रोबोटिक सर्जरी और टेलीमेडिसिन जैसी अत्याधुनिक तकनीकें व्यापक रूप से उपलब्ध होंगी। इन नवाचारों से भारत चिकित्सा पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक गंतव्य बन जाएगा।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत

भारत की चिकित्सा सेवाएं न केवल किफायती हैं, बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी पश्चिमी देशों से प्रतिस्पर्धा करती हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में विदेशी मरीज भारत का रुख कर रहे हैं। यहां उन्हें विश्वस्तरीय उपचार कम लागत पर उपलब्ध होता है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषकों का कहना है कि मेडिकल टूरिज्म में भारत की बढ़ती भूमिका न केवल विदेशी मरीजों को लाभ पहुंचाएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश और तकनीकी नवाचार भारत को आने वाले वर्षों में वैश्विक चिकित्सा पर्यटन का सबसे पसंदीदा केंद्र बना सकते हैं।

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