प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के लिए शुभकामना संदेश भेजा। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने प्रधानमंत्री का संदेश पढ़कर सुनाया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि वर्ष 1921 में शिमला से शुरू हुआ यह सम्मेलन आज एक लंबी और समृद्ध यात्रा तय कर चुका है। उन्होंने 2021 में शिमला में आयोजित शताब्दी सम्मेलन में अपनी सहभागिता को याद करते हुए कहा कि यह सम्मेलन देश की संसदीय परंपराओं का सशक्त प्रतीक है।
लोकतंत्र की आत्मा है बहस और विमर्श
प्रधानमंत्री ने अपने एक पेज के बधाई संदेश में कहा कि बहस और विमर्श लोकतंत्र की आत्मा हैं। ये पारदर्शिता, निष्पक्षता और भिन्न मतों के प्रति सम्मान को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे सदन की कार्यवाही को निष्पक्ष, सुचारु और मर्यादित बनाए रखने का दायित्व निभाते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री का संदेश इस बात पर जोर देता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पीठासीन अधिकारियों की भूमिका निर्णायक है।


