पारिवारिक विवाद और घरेलू तनाव से जूझ रहे एक बुजुर्ग दंपती ने आखिरकार घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने का निर्णय लिया। रविवार को वृद्ध लाल सिंह अपनी पत्नी श्यामवती देवी, बेटी गुड़िया और दामाद श्यामवीर के साथ रामलाल वृद्धाश्रम पहुंचे। उनके चेहरे पर पारिवारिक कलह का दर्द साफ झलक रहा था।
दंपती ने आश्रम प्रबंधन को बताया कि बेटे-बहू के लगातार झगड़ों और विवादों से उनका जीवन कठिन हो गया है। घरेलू तनाव ने उन्हें इतना परेशान कर दिया कि उन्होंने आश्रम में शरण लेने का फैसला किया।
आश्रम प्रबंधन की पहल
रामलाल वृद्धाश्रम के प्रबंधन ने बुजुर्ग दंपती की समस्या गंभीरता से सुनी और तुरंत बेटे-बहू से संपर्क किया। बातचीत और काउंसलिंग के दौरान बेटे-बहू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके व्यवहार ने माता-पिता को मानसिक पीड़ा दी है।
काउंसलिंग के बाद बेटे-बहू ने बुजुर्ग दंपती को सम्मानपूर्वक अपने साथ वापस ले जाने का निर्णय लिया। इस दौरान आश्रम प्रबंधन ने परिवार को समझाया कि बुजुर्गों का सम्मान और देखभाल करना हर संतान का कर्तव्य है।
पारिवारिक कलह का असर
लाल सिंह और श्यामवती देवी ने बताया कि लगातार झगड़ों और तनाव ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि परिवार में शांति और आपसी समझ ही सबसे बड़ी ताकत होती है, लेकिन जब यह टूटती है तो जीवन कठिन हो जाता है।
निष्कर्ष
यह घटना न केवल एक परिवार की कहानी है, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बुजुर्गों की भावनाओं और सम्मान को समझना बेहद जरूरी है। पारिवारिक कलह से बचने और रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए संवाद और आपसी सहयोग ही सबसे बड़ा समाधान है।


