पटना में छात्रा की संदिग्ध मौत: अवैध तंत्र, राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल

2.2kViews
1414 Shares

पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने राजधानी के माहौल को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना अब केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि शहर में तेजी से फैल रहे कथित अवैध तंत्र, राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

इस मामले ने न केवल छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को चिंतित किया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव इस मुद्दे पर सबसे मुखर आवाज बनकर सामने आए हैं। उन्होंने सरकार, पुलिस और उन तथाकथित “सफेदपोश संरक्षकों” पर तीखे आरोप लगाए हैं, जिन पर इन अवैध ठिकानों को संरक्षण देने का संदेह जताया जा रहा है।

पप्पू यादव ने कहा कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो सच्चाई कभी सामने नहीं आएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि पटना में mushroom की तरह फैल चुके हॉस्टल और लॉज प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहे हैं, लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन हॉस्टलों और लॉजों पर सरकार का नियंत्रण क्यों नहीं है। उनका दावा है कि इन ठिकानों को प्रभावशाली और रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण प्रशासनिक तंत्र इन पर कार्रवाई करने से बचता है।

अवैध ठिकानों पर सवाल

पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी के साथ हॉस्टलों और लॉजों का जाल भी तेजी से फैलता जा रहा है। कई जगहों पर बिना किसी मानक और सुरक्षा व्यवस्था के ये ठिकाने संचालित हो रहे हैं। छात्राओं और छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ सामने आ रही हैं।

पप्पू यादव ने कहा कि इन ठिकानों पर न तो उचित निगरानी है और न ही कोई पारदर्शी व्यवस्था। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसे स्थानों पर छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है और कई बार इनका इस्तेमाल गलत गतिविधियों के लिए भी किया जाता है।

राजनीतिक संरक्षण का आरोप

सांसद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि इन अवैध ठिकानों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जब तक इन संरक्षकों की भूमिका की जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने आना मुश्किल है।

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रा की मौत केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विफलता को उजागर करती है। यदि इस मामले की गहराई से जांच नहीं की गई, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएँ और बढ़ सकती हैं।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

इस घटना के बाद प्रशासनिक चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। पप्पू यादव ने कहा कि यदि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।

उन्होंने मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। साथ ही, पटना में संचालित सभी हॉस्टलों और लॉजों की समीक्षा कर उनके संचालन पर सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए।

निष्कर्ष

पटना में छात्रा की संदिग्ध मौत ने राजधानी के सामाजिक और राजनीतिक ताने-बाने को हिला दिया है। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उस अव्यवस्थित और कथित रूप से संरक्षित तंत्र का प्रतीक है, जो छात्रों की सुरक्षा और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या सच्चाई सामने आती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *