टेनिस की दुनिया का नाम लेते ही सबसे पहले जिस खिलाड़ी की छवि आंखों के सामने आती है, वह हैं रोजर फेडरर। फेडरर सिर्फ एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि टेनिस का पर्याय, प्रेरणा और इतिहास हैं। वहीं, राफेल नडाल भी उन दिग्गजों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से खेल जगत में अमिट छाप छोड़ी है।
इसी बीच, मेलबर्न की धरती पर आज से साल का पहला ग्रैंडस्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 शुरू हो गया है। अगले दो सप्ताह तक नीले कोर्ट पर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। फैंस इस दौरान रोमांचक मुकाबलों, नए रिकॉर्ड और इतिहास रचने वाले पलों के गवाह बनने के लिए तैयार हैं।
लेकिन टेनिस का असली हथियार सिर्फ खिलाड़ी नहीं, बल्कि वह रैकेट है, जिसे बनाने में एक पूरी टीम की मेहनत शामिल होती है। रैकेट तैयार करने वाली टीम डिजाइन, तकनीक और सामग्री पर गहन शोध करती है ताकि खिलाड़ी कोर्ट पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें।
रैकेट बनाने की प्रक्रिया के रोचक तथ्य:
- रैकेट का फ्रेम कार्बन फाइबर और ग्रेफाइट जैसी हल्की लेकिन मजबूत सामग्री से बनाया जाता है।
- स्ट्रिंग्स की टेंशन और पैटर्न खिलाड़ी की शैली के अनुसार तय किए जाते हैं।
- हर रैकेट को बैलेंस, वजन और ग्रिप के हिसाब से टेस्ट किया जाता है।
- प्रोफेशनल खिलाड़ियों के लिए कस्टमाइज्ड रैकेट तैयार किए जाते हैं, ताकि वे अपनी ताकत और तकनीक का पूरा इस्तेमाल कर सकें।
ऑस्ट्रेलियन ओपन जैसे टूर्नामेंट में जब खिलाड़ी कोर्ट पर उतरते हैं, तो उनके हाथ में मौजूद रैकेट ही उनकी सबसे बड़ी ताकत और हथियार होता है। यही वजह है कि रैकेट बनाने वाली टीम का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना खिलाड़ी का।


