हिंदी साहित्य संगम संस्था के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार रामदत्त द्विवेदी का रविवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
जीवन परिचय
रामदत्त द्विवेदी का जन्म 30 जून 1937 को रामपुर जिले के शाहबाद कस्बे में हुआ था। मात्र तीन वर्ष की आयु में ही उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। बचपन अभावों और संघर्षों में बीता। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुरादाबाद और रामपुर में रिश्तेदारों के संरक्षण में हुई। स्नातकोत्तर शिक्षा के दौरान ही उनकी नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग में मलेरिया इंस्पेक्टर के रूप में हो गई।
साहित्यिक यात्रा
नवगीतकार योगेंद्र वर्मा व्योम के अनुसार, द्विवेदी जी के भीतर कविता का अंकुर हाईस्कूल के समय ही फूट चुका था, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह अंकुर लंबे समय तक पनप नहीं पाया। सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 1996 में वे साहित्यकार राजेन्द्र मोहन शर्मा श्रृंग के सान्निध्य में आए और हिंदी साहित्य संगम संस्था से जुड़े।
यहीं से उनकी काव्य यात्रा ने नई दिशा पाई। उन्होंने जीवन भर स्वान्त: सुखाय लेखन किया और आत्म-प्रचार से दूर रहकर साहित्य को तन-मन-धन से समर्पित किया। उनका समर्पण साहित्यकारों के लिए एक मिसाल माना जाता है।
निष्कर्ष
रामदत्त द्विवेदी का निधन हिंदी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनका संघर्षपूर्ण जीवन और साहित्य के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।


