मिनियापोलिस गोलीकांड: ICE की कार्रवाई पर सवाल, डिटेंशन कैंपों में मौतों का खुलासा

2.3kViews
1050 Shares

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में 7 जनवरी को हुई एक महिला की दर्दनाक मौत ने अमेरिकी इमीग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और ICE एजेंट्स की कार्रवाई को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, रेने निकोले गुड नाम की महिला को ICE एजेंट्स ने उस समय गोली मार दी, जब वह एक चलती कार में सवार थीं। गोली सीधे सिर में लगने के कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक हलकों में ICE की कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

डिटेंशन कैंपों की हालत पर बड़ा खुलासा

मामले के तूल पकड़ने के बीच ICE ने खुद एक प्रेस रिलीज जारी कर चौंकाने वाले आंकड़े सार्वजनिक किए हैं। एजेंसी ने स्वीकार किया है कि अवैध प्रवासियों को हिरासत में रखने वाले डिटेंशन कैंपों में इस साल अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है।

ICE के मुताबिक, बीते साल डिटेंशन सेंटरों में हुई मौतों की संख्या पिछले 20 वर्षों में सबसे अधिक रही। इन आंकड़ों ने हिरासत केंद्रों में रहने की स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रंप काल की नीतियों पर फिर बहस

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दी गई थी। अब मिनियापोलिस की इस घटना और डिटेंशन कैंपों में हो रही मौतों के खुलासे के बाद उन नीतियों की मानवीय कीमत पर फिर से बहस शुरू हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं अमेरिका की इमीग्रेशन पॉलिसी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेही पर गहरे सवाल खड़े करती हैं। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर दबाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *