मकर संक्रांति पर खिचड़ी की परंपरा: स्वाद में विविधता, संस्कृति में एकता

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मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक होने के साथ-साथ भारतीय कृषि परंपरा और सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाता है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन और नई फसल के आगमन का संकेत देता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन खिचड़ी इस पर्व की सबसे महत्वपूर्ण और साझा पहचान बन चुकी है।

उत्तर भारत में मकर संक्रांति को कई स्थानों पर सीधे ‘खिचड़ी पर्व’ कहा जाता है। यहां इस दिन खिचड़ी का सेवन और दान दोनों को शुभ माना जाता है। चावल और दाल से बनी यह सरल लेकिन पौष्टिक डिश नई फसल के स्वागत और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक मानी जाती है।

उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी का विशेष महत्व है। यहां अरहर या मूंग दाल के साथ चावल की खिचड़ी बनाई जाती है, जिसे घी, दही, पापड़ और अचार के साथ परोसा जाता है। इस दिन धार्मिक स्थलों और जरूरतमंदों को खिचड़ी दान करने की परंपरा भी प्रचलित है।

झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में खिचड़ी को स्थानीय अनाजों के साथ तैयार किया जाता है। कई इलाकों में कोदो, सांवा या अन्य मोटे अनाजों का उपयोग कर बनाई गई खिचड़ी को मौसमी साग-सब्जियों के साथ खाया जाता है, जिससे यह और अधिक पोषक बन जाती है।

महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के अवसर पर वरन-खिचड़ी बनाई जाती है। हालांकि यहां तिल और गुड़ का विशेष महत्व है, लेकिन खिचड़ी को संतुलित और सात्विक भोजन के रूप में देखा जाता है।

गुजरात में उत्तरायण पर्व के दौरान पतंगबाजी के साथ खिचड़ी-कढ़ी का विशेष चलन है। हल्की मसालेदार खिचड़ी को मीठी-खट्टी कढ़ी के साथ परोसा जाता है, जो इस क्षेत्र की विशिष्ट भोजन परंपरा को दर्शाता है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में बाजरा और ज्वार से बनी खिचड़ी लोकप्रिय है। सर्दियों में यह भोजन शरीर को गर्म रखने और ऊर्जा प्रदान करने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। पोंगल मूल रूप से खिचड़ी का ही एक रूप है, जिसे चावल, दाल, दूध और गुड़ या नमक के साथ तैयार किया जाता है। यह नई फसल के प्रति धन्यवाद प्रकट करने का प्रतीक है।

देश के विभिन्न हिस्सों में खिचड़ी के स्वाद और रूप भले ही अलग हों, लेकिन इसकी मूल भावना एक ही है—नई फसल का स्वागत, सादगी और सामूहिकता। यही कारण है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन जाती है।

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