मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार, 12 जनवरी को मराठी पहचान के मुद्दे पर अपना स्पष्ट और कड़ा रुख पेश किया। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से ठीक पहले सीएम ने जनता और विपक्ष दोनों को संदेश दिया कि नगर निकाय का नेतृत्व केवल मराठी समाज के हाथों में ही रहेगा।
इस चुनावी घड़ी में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की पार्टी ने कई बार दावा किया कि मराठी मानुष खतरे में है। ऐसे दावों के बीच सीएम फडणवीस ने कहा कि मराठी समुदाय का अस्तित्व खतरे में नहीं है, बल्कि जो राजनीतिक ताकतें यह दावा कर रही हैं, उनका ही अस्तित्व चुनौतीपूर्ण स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों में अक्सर मराठी समाज को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि मराठी संस्कृति और पहचान आज भी मजबूत है। फडणवीस ने जोर देकर कहा कि उनके नेतृत्व में राज्य की सरकार मराठी हितों और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान BMC चुनाव में राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए रणनीतिक कदम माना जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने मराठी समाज को एकजुट करने और विपक्षी राजनीतिक ताकतों को सीधे चुनौती देने के लिए यह वक्तव्य दिया है।
राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि फडणवीस का यह रुख आगामी नगर निगम चुनाव के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मराठी मानुष की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी राजनीतिक दावे या प्रचार के आधार पर समाज को भड़काया नहीं जा सकता।
इस बयान के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी मैदान में मराठी पहचान का मुद्दा फिर से प्रमुख रूप से उठेगा। सीएम के स्पष्ट शब्दों ने यह संदेश दिया कि सत्ता और नेतृत्व का प्रश्न मराठी समाज के हित में रहेगा।
बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच यह बयान राजनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकता है। राज्य की राजनीति में मराठी पहचान का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है, और फडणवीस ने इसे चुनावी रणनीति में प्रभावी रूप से पेश किया है।
इस तरह, मुख्यमंत्री का यह कदम न केवल मराठी समाज को आश्वस्त करता है, बल्कि विपक्षी दलों को भी स्पष्ट संदेश देता है कि केवल राजनीतिक दावों से मराठी समाज के अस्तित्व को चुनौती नहीं दी जा सकती।

