जम्मू-कश्मीर में सूखे का साया: हिमपात न होने से बिजली उत्पादन 77% घटा

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जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड के बावजूद मैदानों से लेकर पहाड़ी इलाकों तक बारिश और हिमपात का गंभीर अभाव बना हुआ है। जनवरी के पहले पखवाड़े के करीब पहुंचने के बावजूद मौसम का यह असामान्य रुख प्रदेश के लिए चिंता का कारण बन गया है। इसका सीधा असर जल संसाधनों, बिजली उत्पादन और बागवानी सेक्टर पर पड़ रहा है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2025 के बीच जम्मू-कश्मीर में केवल 77.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 127.7 मिलीमीटर होती है। इस तरह प्रदेश में लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

बारिश और हिमपात की कमी का सबसे बड़ा असर जलविद्युत उत्पादन पर देखने को मिल रहा है। प्रदेश में बिजली उत्पादन करीब 77 प्रतिशत तक घट चुका है। जिन नदी-नालों से सालभर पानी बहता था, वे अब सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। इससे न केवल बिजली संकट गहराया है, बल्कि पेयजल और सिंचाई व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है।

क्षेत्रवार आंकड़ों की बात करें तो श्रीनगर में सामान्य से 50 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि शोपियां जिले में 78 प्रतिशत और कुलगाम में 65 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज हुई है। दिसंबर 2025 के अंत में उच्च पर्वतीय इलाकों में हल्का हिमपात जरूर हुआ, लेकिन वह नाममात्र रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बर्फ अधिक समय तक टिकने की संभावना नहीं रखती।

लंबे समय तक सूखे जैसे हालात बने रहने से सेब सहित अन्य फलों की गुणवत्ता और पैदावार पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त हिमपात न होने से मिट्टी में नमी का स्तर घटेगा, जिससे आगामी मौसम में उत्पादन प्रभावित होना तय माना जा रहा है।

मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल निकट भविष्य में किसी बड़े वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के संकेत नहीं हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में सूखे और बिजली संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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