राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर शुद्ध जल नल योजना जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है। योजना के तहत तीन या उससे अधिक घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे किए गए थे, लेकिन कई क्षेत्रों में हालात इसके ठीक उलट हैं। स्थिति यह है कि बड़ी संख्या में लोगों को आज भी पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
कई इलाकों में नल से पानी की आपूर्ति असंतुलित बनी हुई है। कहीं सरकारी नल से खेतों की सिंचाई की जा रही है, तो कहीं घरों में पीने के लिए एक बूंद पानी भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। इससे योजना की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी चिंताजनक बताए जा रहे हैं। अनेक गांवों में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन नियमित जलापूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी। कहीं मोटर लंबे समय से खराब पड़ी है, तो कहीं बोरिंग पूरी तरह सूख चुकी है। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में योजना को पूर्ण दर्शाया जा रहा है।
इस विरोधाभासी स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। लोगों का आरोप है कि बिना जमीनी सत्यापन के कागजों में योजना को सफल दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में ग्रामीण आबादी को शुद्ध पेयजल तक मयस्सर नहीं हो पा रहा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से योजना की निष्पक्ष जांच और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।

