ई-रवन्ना प्रणाली में बार-बार आ रही तकनीकी खामियों ने गौला नदी क्षेत्र में खनन कारोबार को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। गुरुवार को हालात ऐसे रहे कि गौला नदी से पांच हजार से अधिक खनन वाहनों की निकासी नहीं हो सकी। नतीजतन, ये वाहन नदी क्षेत्र में ही खड़े रह गए, जहां ड्राइवरों को ठंड भरी रात वाहनों की सुरक्षा में बिताने के लिए मजबूर होना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को पूरे दिन इन्हीं फंसी हुई गाड़ियों को विभिन्न गेटों से बाहर निकालने की प्रक्रिया चलेगी। ऐसे में खनन कार्य पूरी तरह से बाधित रहने की आशंका है। लगातार हो रही इस तकनीकी समस्या के कारण न सिर्फ खनन गतिविधियां ठप हो रही हैं, बल्कि इससे जुड़े हजारों लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
ई-रवन्ना सिस्टम में रोजाना सामने आ रही खराबी को लेकर खनन कारोबारी खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि सिस्टम की अस्थिरता के चलते उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही सरकार के राजस्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है, क्योंकि खनन निकासी बाधित होने से उपखनिज परिवहन रुक जाता है।
गुरुवार को ई-रवन्ना में आई तकनीकी दिक्कतों की वजह से उपखनिज लेने के लिए गौला नदी में गई सैकड़ों गाड़ियां विभिन्न गेटों पर फंस गईं। मोटाहल्दू, आंवला चौकी, शीशमहल समेत अन्य निकासी गेटों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। देर शाम तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी, जिससे वाहन चालकों और कारोबारियों की परेशानी और बढ़ गई।
खनन कारोबार से जुड़े लोगों ने मांग की है कि ई-रवन्ना प्रणाली को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि खनन कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके और भविष्य में इस तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।

