अब डिजिटल इंडिया का युग है और यह न्यू इंडिया है। देवरिया की वंशिका व जूली, मंशा, सीमा और राममिस्त्री जैसी महिलाएं और युवतियां आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के सपने को साकार करने के लिए डिजिटल दुनिया में नवाचार और पहचान बना रही हैं।
किसी ने पुरुषों के दबदबे वाले फोटोग्राफी पेशे में कदम रखा है, तो किसी ने डिजिटल लाइब्रेरी खोलकर या डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़कर खुद का व्यवसाय शुरू किया। इन महिलाओं ने डिजिटल सशक्तीकरण के माध्यम से न केवल परिवार और समाज का दृष्टिकोण बदला, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर खुद निर्णय लेने की क्षमता हासिल की। इस मार्ग में जागृति जैसी संस्थाओं ने उनकी राह आसान करने में अहम योगदान दिया।
फोटोग्राफी पेशे में आगे बढ़ रही वंशिका और जूली
शहर की रहने वाली वंशिका और जूली इस बदलाव की जीवंत तस्वीर हैं। इन्होंने फोटोग्राफी जैसे पेशे में अपनी अलग पहचान बनाई। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करने का शौक ही उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का मार्ग दिखा। आज ये शादी-ब्याह और सामाजिक कार्यक्रमों की नियमित फोटोग्राफर बन चुकी हैं और डिजिटल माध्यम से अपने व्यवसाय को बढ़ा रही हैं।

