मध्यप्रदेश के देवास शहर में मंगलवार दोपहर एबी रोड पर सामने आया एक दृश्य व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। तेज धूप और व्यस्त सड़क के बीच एक व्यक्ति अपनी बीमार महिला परिजन को ठेले पर बैठाकर अस्पताल की ओर ले जाता नजर आया। राहगीर यह दृश्य देखकर ठिठक गए, जबकि किसी तरह की त्वरित मदद मौके पर उपलब्ध नहीं हो सकी। घटना का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
ऑटो का किराया नहीं, मजबूरी में ठेले का सहारा
जानकारी के अनुसार, न्यू देवास निवासी यह व्यक्ति अपनी महिला परिजन को इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहा था। आर्थिक तंगी के चलते उसके पास ऑटो या किसी अन्य निजी वाहन का किराया देने के पैसे नहीं थे। मजबूरी में उसने ठेले पर महिला को बैठाया और खुद धक्का देकर अस्पताल तक पहुंचाने के लिए निकल पड़ा। पूछे जाने पर उसने कहा, “गरीब की कहीं सुनवाई नहीं होती।”
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने शहरी क्षेत्रों में आपात स्वास्थ्य परिवहन की उपलब्धता और पहुंच पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में एम्बुलेंस सेवाओं की त्वरित उपलब्धता और जागरूकता आवश्यक है, ताकि किसी भी मरीज को इस तरह के जोखिम भरे हालात का सामना न करना पड़े।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया की अपेक्षा
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जा रही है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि गरीब और जरूरतमंदों के लिए निशुल्क या सुलभ आपात परिवहन की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।
यह घटना न केवल आर्थिक असमानताओं की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी बताती है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अभी भी कई लोगों के लिए चुनौती बनी हुई है।

