बेतिया स्कूल मारपीट मामला: अनुशासन के नाम पर हिंसा, शिक्षक-छात्र संबंधों पर सवाल

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विद्यालय को बच्चों के लिए एक सुरक्षित, संवेदनशील और सीखने का माहौल माना जाता है, लेकिन पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय ओझवलिया से सामने आई घटना ने इस धारणा को गंभीर रूप से झकझोर कर रख दिया है। कक्षा-9 के दो छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट को अब केवल एक अनुशासनात्मक मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे शिक्षक-छात्र संबंधों के मूल सिद्धांतों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।

यह मामला 6 दिसंबर का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, कक्षा के दौरान एक छात्र से अनजाने में डकार निकल गई। आरोप है कि इस बात को लेकर दो शिक्षक आपा खो बैठे और दोनों छात्रों को कक्षा से बाहर निकालकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा ने स्कूल परिसर में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया।

घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना उस मानसिकता को उजागर करती है, जिसमें संवाद और समझाइश की जगह दंड और हिंसा को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे मामलों से न सिर्फ बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित होता है, बल्कि विद्यालय जैसे संस्थानों पर से भरोसा भी कमजोर पड़ता है।

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