दूषित जल का संकट: 250 से अधिक गांवों में पांच लाख लोग प्रभावित

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जिले के 250 से अधिक गांवों में पांच लाख से ज्यादा लोग आज भी दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं। इस गंभीर समस्या के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं, जिससे जनस्वास्थ्य पर लगातार खतरा बढ़ता जा रहा है।

केंद्र और प्रदेश सरकारें लोगों के बेहतर स्वास्थ्य और जीवन स्तर को सुधारने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही हैं। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हर घर नल जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी लागू की गई हैं, ताकि हर नागरिक तक सुरक्षित पानी पहुंचाया जा सके।

हालांकि, जमीनी स्तर पर इन योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता सामने आ रही है। कई गांवों में न तो नियमित जलापूर्ति हो पा रही है और न ही पानी की गुणवत्ता की प्रभावी जांच की जा रही है। परिणामस्वरूप, लोगों को इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच प्रशासन की सुस्ती पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में, पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों की आवाज उठाने और प्रशासन को सक्रिय करने के उद्देश्य से दैनिक जागरण ने छह दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की है।

इस अभियान के माध्यम से जिले के उन गांवों की स्थिति को सामने लाया जाएगा, जहां शुद्ध पेयजल आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, ताकि जिम्मेदार विभागों पर ठोस कार्रवाई का दबाव बनाया जा सके।

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