हर साल सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व देने वाली दादरी जीएसटी विंग आज बुनियादी संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी से जूझ रही है। स्थिति यह है कि नगर परिषद के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के केवल तीन कमरों में कार्यालय संचालित हो रहा है, जहां तैनात 16 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि विंग के पास इस समय एक भी सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि कार्यालय भवन के लिए भूमि आवंटन को लेकर राजस्व विभाग से कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
जिला बने नौ वर्ष बीत जाने के बावजूद दादरी में डीईटीसी (DETC) का पद अब तक सृजित नहीं किया गया है। इसके चलते दादरी जीएसटी विंग अभी भी भिवानी डीईटीसी के अधीन कार्य कर रही है। इसके अलावा आईटीओ और एईटीओ के पद भी लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। विंग में एक भी चालक तैनात नहीं है, जिससे फील्ड जांच और प्रवर्तन कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि गठबंधन सरकार के कार्यकाल में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने वर्ष 2023 में घोषणा की थी कि हर जिले की जीएसटी विंग के लिए अलग भवन बनाया जाएगा। इस घोषणा के बाद रेवाड़ी, गुरुग्राम, सोनीपत, फरीदाबाद और मेवात में जीएसटी विंग को अपने भवन मिल चुके हैं, लेकिन दादरी जीएसटी विंग अब भी इस सुविधा से वंचित है।
स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते स्टाफ, वाहन और भवन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो इसका सीधा असर राजस्व संग्रह और कर प्रवर्तन पर पड़ेगा। अब निगाहें सरकार पर टिकी हैं कि वह राजस्व में अहम योगदान देने वाली दादरी जीएसटी विंग की अनदेखी कब तक करती है।

