भागलपुर : प्लस टू स्कूलों में इंटर में नामांकन तो हुआ भरपूर, पर परीक्षा से गायब रहेंगे 4,444 विद्यार्थी

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एक ओर शिक्षा विभाग दावा कर रहा है कि अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, स्कूलों और कालेजों में नामांकन बढ़ रहा है। दूसरी ओर, नामांकन को लेकर परीक्षा तक में नहीं पहुंच पाने वाले हजारों छात्र-छात्राएं विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह कि इन बच्चों ने पढ़ाई क्यों छोड़ी, वे कहां चले गए और उनके भविष्य का क्या हुआ, इसकी वजह तक विभाग को पता तक नहीं है।

 

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने जिले को भेजी अंतिम सूची

दरअसल, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की अंतिम सूची जिला शिक्षा विभाग को भेज दी है। जिसमें जानकारी मिली है कि जिले में इंटर परीक्षा के लिए नामांकन कराने वाले 4444 छात्र-छात्राएं अब परीक्षा से बाहर हो गए हैं। न तो उन्होंने परीक्षा का आवेदन भरा और न ही यह स्पष्ट है कि वे पढ़ाई छोड़कर आखिर कहां चले गए। जिला शिक्षा विभाग की ओर से पहले 61 परीक्षा केंद्रों पर 44644 परीक्षार्थियों के शामिल होने की सूची भेजी गई थी, लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से आई अंतिम सूची के अनुसार अब केवल 40200 छात्र-छात्राएं ही परीक्षा में बैठेंगे। यह अंतर सीधे तौर पर नामांकन अभियान और निगरानी व्यवस्था की पोल खोलता है।

सबसे अधिक कला संकाय में 3055 तो विज्ञान संकाय में 1286 घटे

अंतिम आंकड़ों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले 40,200 परीक्षार्थियों में से 20985 कला संकाय, 18671 विज्ञान संकाय और 544 वाणिज्य संकाय के छात्र-छात्राएं हैं। सबसे अधिक गिरावट कला संकाय में आई है। पहले भेजी गई सूची में कला संकाय से 24040 परीक्षार्थियों के शामिल होने की बात कही गई थी, जो अब घटकर 20985 रह गई है। यानी 3055 छात्र-छात्राएं सिर्फ कला संकाय से गायब हो गए। वहीं विज्ञान संकाय में पहले 19957 परीक्षार्थियों की संख्या बताई गई थी, जो अब घटकर 18671 हो गई है।

44644 बच्चे थे जिले में इंटर में नामांकित

इस तरह विज्ञान में 1286 विद्यार्थी कम हो गए। वाणिज्य संकाय में भी हालात बेहतर नहीं है। पहले 647 परीक्षार्थियों के शामिल होने की सूची थी, जो अब घटकर 544 रह गई है। यानी 103 छात्र-छात्राएं परीक्षा की दौड़ से बाहर हो गए।

व्यवस्था की कमजोरी भी जिम्मेदार

जिला शिक्षा विभाग के एक पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इंटरमीडिएट परीक्षा से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के बाहर होने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। कई छात्रों ने केवल नामांकन कराया, लेकिन नियमित पढ़ाई नहीं होने के कारण परीक्षा का आवेदन नहीं भरा। आर्थिक तंगी के कारण कुछ छात्र पढ़ाई छोड़कर रोजगार की तलाश में बाहर चले गए।

 

40200 छात्र-छात्राएं अंतिम रूप से परीक्षा में होंगे शामिल

कई मामलों में दूसरे जिले या निजी संस्थानों में नामांकन लेकर वहीं पढ़ाई जारी रखने की जानकारी मिली है। कुछ छात्र-छात्राओं ने विषय परिवर्तन किया या तकनीकी व व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रुख किया। इसके अलावा पारिवारिक दबाव, समय पर शैक्षणिक मार्गदर्शन का अभाव और निगरानी व्यवस्था की कमजोरी भी बड़ी वजह मानी जा रही है।

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